नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने उड़ी में सेना पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले की जांच शुरू कर दी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस से जांच अपने हाथ में लेते ही एनआईए ने सैंपल लेने की कवायद शुरू कर दी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों से बरामद हुए दो मोबाइल और दो जीपीएस कब्जे में ले लिए हैं। एनआईए अब आतंकियों की शिनाख्त के लिए डीएनए सैंपल लेकर जांच करेगी।
सूत्रों ने बताया कि उड़ी हमले के बाद ढेर किए गए चारों आतंकियों की तस्वीरें जम्मू-कश्मीर सहित देश की विभिन्न जेलों में कैद जैश आतंकियों को दिखाई जाएंगी।
जले हुए मिले है आतंकियों के शरीर
उड़ी हमले में मारे गए आतंकी
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जांच के दौरान दो आतंकियों के शरीर के निचले भाग बुरी तरह से जले पाए गए हैं। बरामद हुए दो जीपीएस में से एक जलने की वजह से खराब हो चुका है। दूसरे जीपीएस की जांच विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है।
जीपीएस के माध्यम से आतंकियों के घुसपैठ और सैन्य शिविर तक पहुंचने के रूट का पता लगाया जाएगा। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि आतंकियों को सैन्य शिविर तक किसी स्थानीय शख्स ने मदद तो नहीं की।
हमले वाली जगह लाइन आफ कंट्रोल से महज छह किलोमीटर की दूरी पर है।
पाकिस्तान को घेरने के लिए तैयार होगा डोजियर
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जांच के बाद एनआईए टीम डोजियर तैयार करेगी और आतंकियों की शिनाख्त होने पर पाकिस्तान को सबूतों का पुलिंदा सौंपा जा सकता है। आतंकी हमले को लेकर सेना ने भी जांच शुरू कर दी है।
सेना की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आतंकी हमला करने से एक दिन पूर्व ही कैंप में दाखिल हो गए थे। जांच के दौरान लापरवाही के पहलू सामने आने पर भविष्य में सुरक्षा पुख्ता करने के सुझाव दिए जाएंगे। समझा जा रहा है पाकिस्तानी आतंकी तंजीमें एलओसी से सटे इलाकों को निशाना बना रही हैं। घुसपैठ करने के बाद जो भी सैन्य प्रतिष्ठान सामने नजर आता है उस पर हमला करने की रणनीति है।