कश्मीर में आतंकियों ने हमला करने का तरीका बदल दिया है। फिदायीन हमलों में नाकाम होने, टाप कमांडरों के मारे जाने, ओजी वर्करों और अलगाववादियों पर टेरर फंडिंग मामले में कसे गए एनआईए के शिकंजे ने आतंकियों को मिलने वाले संसाधनों पर बड़ा असर डाला है। इस वजह से आतंकी अब सीधा हमला करने की जगह ग्रेनेड हमले या फायरिंग कर भाग रहे हैं। आतंकी कश्मीर में ‘मारो और भागो’ की नीति पर आ गए हैं।
एक तरफ पिछले एक साल में कश्मीर में दस टाप कमांडरों सहित 21 कमांडरों को मार गिराया गया है। इससे आतंकियों का पीओके में बैठे आकाओं से संपर्क टूट गया है। दूसरी तरफ टेरर फंडिंग में अलगाववादियों, बड़े कारोबारियों, ओजी वर्करों को एनआईए ने दबोच लिया है। इससे आतंकियों को दोनों ही तरफ से मिलनी वाली वित्तीय मदद और अन्य संसाधनों में कमी आई है।
वहीं आतंकियों को पैसा और गोला बारूद भी नहीं मिल रहा है। वह सुरक्षाबलों से सीधा हमले करने में कमजोर साबित हो रहे हैं। इस वजह से अब सीधा हमला करने की जगह ग्रेनेड हमले कर भाग रहे हैं। वहीं सेना और सीआरपीएफ की ओर से आतंकियों के फिदायीन हमलों को भी नाकाम किया गया है।
एलओसी पर आतंकियों की घुसपैठ भी नहीं हो पा रही।
इस वजह से भी आतंकियों का नेटवर्क कमजोर हुआ है। आतंकी कश्मीर में किसी न किसी तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अब बड़े हमलों की जगह छोटे हमले कर रहे हैं। इसमें आम नागरिकों, नेताओं और बाहरी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।