कैमरा 30 जनवरी, 2024 को डोंगगुआन (चीन) में एक्टिवेट किया गया था। हालांकि, निर्माता ने बताया कि उसके पास डाउनस्ट्रीम ट्रांजेक्शन डिटेल्स या एंड-यूजर रिकॉर्ड नहीं है। इससे एनआईए को खरीदार/एंड-यूजर और उससे जुड़े टेक्निकल रिकॉर्ड का पता लगाने के लिए चीनी अधिकारियों से कानूनी मदद लेनी पड़ी क्योंकि एक्टिवेशन, शुरुआती इस्तेमाल और कॉमर्शियल ट्रेल चीन के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।अदालत ने कहा, चूंकि भारत व चीन ने इस विषय पर म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी/एग्रीमेंट (एमएलएटी) पर हस्ताक्षर नहीं हैं इसलिए आवेदन यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम (यूएनटीओसी) के जरिए भेजा जाएगा। इसे दोनों देशों की मंजूरी हासिल है।
आदेश में यह भी लिखा है कि गृह मामलों के मंत्रालय ने पिछले साल 27 अप्रैल की जांच में न्यायिक अनुरोध पत्र जारी करने की मंजूरी दे दी है। जब्त डिवाइस की चेन ऑफ कस्टडी, यूजर एट्रिब्यूशन और सबूतों से जुड़े लिंक को तय करने के लिए मांगी गई जानकारी को आवश्यक बताते हुए विशेष न्यायाधीश ने अर्जी मंजूर कर ली। बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए खरीदार, एंड-यूजर और टेक्निकल रिकॉर्ड का पता लगाने में मदद के लिए चीन की सक्षम ज्यूडिशियल अथॉरिटी को न्यायिक अनुरोध पत्र जारी किया।
कोर्ट ने विशेष जांच अधिकारी को न्यायिक अनुरोध पत्र की सॉफ्ट कॉपी चाइनीज में ट्रांसलेट की गई कॉपी के साथ एमएलएटी पोर्टल पर अपलोड करने, इसके ट्रांसलेशन के साथ तीन फिजिकल सेट (एक ओरिजिनल और दो कॉपी) सीबीआई, आईपीसीयू, नई दिल्ली को भेजने का निर्देश दिया। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय से एक फॉरवर्डिंग लेटर लेगा और इसे डिप्लोमेटिक चैनलों के जरिए संबंधित देश को अर्जी भेजेगा। जेएनएफ