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Jammu Kashmir: हिजबुल आतंकियों को पनाह देने के आरोपी शिक्षक को झटका, एनआईए कोर्ट ने खारिज की जमानत

Tue, 01 Sep 2026 06:44 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

विशेष एनआईए अदालत ने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को पनाह, भोजन और लॉजिस्टिक मदद देने के आरोपी निजी स्कूल शिक्षक तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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NIA - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को पनाह, खाना और अन्य मदद पहुंचाने के मामले में गिरफ्तार निजी स्कूल शिक्षक तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में प्रथम दृष्टया उसके गैरकानूनी और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के संकेत मिलते हैं।

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गवाहों को प्रभावित करने की जताई आशंका
विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर की अदालत ने माना कि आरोपी की रिहाई से चल रहे मुकदमे पर असर पड़ सकता है और उसके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

पांच साल से अधिक समय से जेल में है आरोपी
डोडा जिले के तंतना गांव निवासी तनवीर अहमद मलिक को 1 मार्च 2021 को आतंकी मामले में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने 22 मई 2021 को इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिनमें तीन मारे जा चुके आतंकी भी शामिल हैं।

आतंकियों को घर और गुफा में पनाह देने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मलिक ने जून 2019 से जनवरी 2020 तक हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों हारून अब्बास वानी और ताहिर अहमद भट को भोजन, रहने की जगह और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई। आरोप है कि उसने अपने घर के अलावा घर के पास बनी एक भूमिगत गुफा में भी आतंकियों को पनाह दी।

सरकारी हथियार लूटने के मामले से जुड़ा है केस
मामला 8 मार्च 2019 की उस घटना से जुड़ा है, जब आतंकियों ने किश्तवाड़ में तत्कालीन उपायुक्त के एस्कॉर्ट प्रभारी हेड कांस्टेबल दलीप सिंह से उनकी सर्विस राइफल, तीन मैगजीन और 90 राउंड लूट लिए थे। शुरुआत में मामला किश्तवाड़ थाने में दर्ज हुआ था, बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली।

बचाव पक्ष ने लंबी हिरासत का दिया हवाला
बचाव पक्ष ने मलिक को पांच साल से अधिक समय से जेल में होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। वहीं, एनआईए ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि आरोपी की रिहाई से मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

अदालत ने गंभीरता को माना अहम
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपों की गंभीरता, रिकॉर्ड पर मौजूद प्रथम दृष्टया सामग्री, मुकदमे की स्थिति और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
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