उत्तराखंड में बिजली हुई महंगी।
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प्रदेश व राष्ट्र की बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए एनएचपीसी जम्मू संभाग में चिनाब दरिया पर अब तक सबसे बड़ी परियोजना सावलकोट की व्यवहारिकता जांचने में जुट गई है। परियोजना के लिए वन क्लीयरेंस के अलावा अन्य विभागों से अनुमति की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। हालांकि चिनाब दरिया पर प्रस्तावित 1000 मेगावाट पन बिजली उत्पादन क्षमता की बरसर पन बिजली परियोजना व्यवहारिकता न बन पाने व सिंचाई संबंधित मुद्दों पर ठंडे बस्ते में चली गई है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सावलकोट पन बिजली परियोजना की डीपीआर के तहत 19020.99 करोड़ की अनुमानित राशि से 96 माह में परियोजना का निर्माण होना है। जिला रामबन और उधमपुर में चिनाब दरिया पर परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है। परियोजना के तकनीकी पहलुओं के अनुसार 192.5 मीटर का हाई कंक्रीट डैम तैयार किया जाएगा। अंडर ग्राउंड पावर हाउस के अलावा डाइवर्जन टनल का निर्माण भी होगा। व्यवहारिकता व अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परियोजना को शुरू किया जाएगा।
अभी तक हो पाया सिर्फ 3263 मेगावाट पन बिजली का दोहन
जम्मू-कश्मीर में पन बिजली उत्पादन की क्षमता बीस हजार मेगावाट है, लेकिन अभी तक 3263 मेगावाट का ही दोहन हो पाया है। प्रदेश की अपनी 21 परियोजनाओं से 1211 मेगावाट व केंद्र सरकार के तहत सात परियोजनाओं से 2009 मेगावाट पन बिजली का उत्पादन हो रहा है। प्रदेश में बिजली की मांग बढ़कर 4000 मेगावाट को पार जा चुकी है। ऐसे में बिजली की खरीद व अघोषित कटौती के बावजूद भी गर्मी में जम्मू संभाग व सर्दी में कश्मीर में बिजली संकट जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।
सावलकोट परियोजना की डीपीआर को मंजूरी मिल चुकी है। अब व्यवहारिकता जांचने का काम तेजी से चल रहा है। रामबन और उधमपुर जिले में परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है।
- दीपक सहगल, कार्यकारी निदेशक, एनएचपीसी।