जम्मू। उधमपुर-बनिहाल फोरलेन हाईवे के निर्माण के दौरान पांच हिस्सों में अवैध व अवैज्ञानिक तरीके से मलबा फेंकने और निस्तारण में पर्यावरण मानकों में खामिया पाए जाने पर जम्मू कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनएचएआई और संबधित कांट्रैक्टरों पर दो करोड़ रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया है। एनएचएआई को 45 दिन के भीतर जुर्माने की राशि जेएंडके बैंक के खाते में जमा करनी होगी।
इसके बाद जुर्माने के तौर पर 12 फीसदी ब्याज लिया जाएगा। बोर्ड के फील्ड स्टाफ को फोरलेन के विभिन्न हिस्सों में निर्माण एजेंसियों द्वारा पर्यावरण मानकों की शिकायतें मिली थीं। डिवीजनल ऑफिसर रामबन की ओर से 31 जुलाई 2020 और 17 सितंबर 2020 को माननीय एनजीटी के समक्ष पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण मुआवजे की सिफारिश की गई। इसके बाद बोर्ड ने 15 दिसंबर 2020 को तकनीकी सलाहकार कमेटी (टीएसी) को जमीनी स्तर पर मलबे से पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करने को कहा। इस बीच एनएचएआई को कई बार मलबे के उचित निस्तारण को लेकर नोटिस जारी किए गए। जांच में पाया गया कि 100 फीसदी की जगह पांच चिन्हित स्थानों पर 200 फीसदी तक मलबा गिराया गया।
बायोलाजिकल मानकों का पालन नहीं किया
बोर्ड कमेटी ने 3 फरवरी 2021 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि एनएचएआई ने ईएमपी के तहत इंजीनियरिंग और बायोलाजिकल मानकों का पालन नहीं किया। मलबे को दरिया के विभिन्न हिस्सों में गिराया गया, जिससे बायोलाजिकल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा। इससे सीजनल नालों में निकासी रुकी। इस सारी प्रक्रिया से जैव विविधता, दरिया, दैनिक जीवन, प्रकृति पौधारोपण, वन कवर, स्लोप्स की स्थिरता, जियोलाजिकल असंतुलन आदि को नुकसान हुआ। इन सारी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने अंडर सेक्शन 33 (ए), 31 (ए) और सेक्शन 5 जल (संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण) एक्ट 1974, वायु (संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण) एक्ट 1981 और पर्यावरण (सुरक्षा) एक्ट 1986 के तहत एनजीटी के दिशा निर्देशों पर एनएचएआई को दो करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया है। यह अंतरिम मुआवजा होगा, जिसमें विशेषज्ञ कमेटी पूरे नुकसान का आकलन करेगा।