कश्मीर घाटी में दूधगंगा और ममथ कुल जलधाराओं में गंदगी फेंकने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर 35 करोड़ का जुर्माना लगाया है। दूधगंगा झेलम नदी में जाकर मिलती है। एनजीटी ने पाया कि नगर निगम श्रीनगर दूधगंगा में सीवेज फेंक रहा है।
नगर पालिका बडगाम ने ठोस कचरा प्रबंधन नहीं किया और कचरे को ममथ कुल धारा के किनारे फेंका। रजा मुजफ्फर भट की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा कि अवैध खनन रोकने और अपशिष्ट प्रबंधन में प्रशासन ने गंभीर लापरवाही बरती है।
इससे पर्यावरण को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। एनजीटी ने निर्देश देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर इस लापरवाही के लिए 35 करोड़ का जुर्माना लगाया जाता है। सीवेज को सीधे दूधगंगा में डालने के लिए 32 करोड़ और ठोस कचरा फेंकने के लिए तीन करोड़ के मुआवजे का भुगतान करना होगा।
एनजीटी ने कहा कि पूर्व में तीन करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। लिहाजा शेष 32 करोड़ की राशि जमा करानी होगी, जिसे पर्यावरण के क्षतिपूर्ति कार्य में खर्च किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर प्रशासन को 30 अप्रैल 2023 तक एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करानी होगी। मामले की अगली सुनवाई 24 मई को निर्धारित की गई।