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एनजीटी ने J&K सरकार से जैविक कचरे के निपटारे को लेकर मांगी रिपोर्ट

Tue, 26 Jul 2016 11:21 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जम्मू-कश्मीर सरकार व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वे ऐसे अस्पतालों की सूची व विस्तृत रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करें जो जैविक कचरे का संग्रहण और निष्पादन मानकों और नियमों के अनुरूप नहीं कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि प्राधिकरण यह भी बताएं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ अभी तक क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से ट्रिब्यूनल में रिपोर्ट पेश की गई थी। हालांकि, रिपोर्ट आधी-अधूरी होने के कारण पीठ ने उसे खारिज कर दिया।

पीठ ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए जाएंगे। यह सरकार और संबंधित प्राधिकरण के लिए आखिरी मौका होगा कि वे ट्रिब्यूनल के आदेशों का बिना देरी किए पालन करें।
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समय पर व्यवस्था नहीं हुई तो श्रीनगर बन जाएगा डंपिंग ग्राउंड

- फोटो : अमर उजाला
पीठ ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण अपनी विस्तृत रिपोर्ट में समूचे राज्य में उन अस्पतालों के बारे में भी विस्तृत जानकारी ट्रिब्यूनल को दें जो कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी हासिल किए बिना संचालित हो रहे हैं।  

साथ ही यह भी बताएं कि आदेश, मानकों व नियमों का उल्लंघन करने वाले इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्या कदम प्रस्तावित है? रिपोर्ट में बड़े अस्पतालों के नाम भी प्रस्तावित होने चाहिए।

पीठ ने कहा कि प्राधिकरण सिर्फ जैविक कचरे की स्थिति ही नहीं बल्कि जैविक कचरे की डंपिंग के लिए चिह्नित किए गए स्थलों की जानकारी भी मुहैया कराएं। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि श्रीनगर में रोजाना करीब 400 टन कचरा पैदा होता है।

ऐसे में यदि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट जैसी व्यवस्था ठीक तरीके से और समय पर नहीं हुई तो पूरा शहर एक डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो जाएगा। वहीं सुनवाई के दौरान सूबे की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए निविदा निकाली गई थी, इसका समय भी बढ़ाया गया। इसके बावजूद अभी तक किसी ने इसके लिए आवेदन नहीं किया है।
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