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लेफ्टिनेंट राणे के फौलादी इरादों ने बचाया था 'राजोरी' को

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सेना के जवानों की वीरता की गाथाएं प्रेरणाओं से भरी हैं। वर्ष 1947 में पाकिस्तानी कबायलियों से राजोरी को मुक्त कराने की गाथा भी ऐसी ही है। भारतीय सेना की उस समय दिखाई गई बहादुरी जवानों ही नहीं, स्थानीय लोगों को भी वतन के लिए मर मिटने को प्रेरित करती है।
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उस दौर के हालात और सेना के जवानों की कुर्बानी याद करने के लिए ही यहां राजोरी दिवस मनाया जा रहा है। इसी शनिवार से शुरू हुआ यह समारोह 16 अप्रैल तक चलेगा।

राजोरी को कबायलियों से मुक्त कराने की जब भी बात होती है तो 37 असाल्ट फील्ड कंपनी के सेकेंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे का नाम जुबां पर आता है। उनकी शहादत के बाद उनकी याद में राजोरी में राणे हवाई पट्टी का निर्माण कराया गया।
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वह 8 अप्रैल 1948 का दिन था जब 4 डोगरा रेजीमेंट ने राजोरी को कबायलियों से मुक्त कराने के लिए नौशेरा से राजोरी की ओर बढ़ना शुरू किया। दुश्मनों ने रास्ते में अवरोध तथा माइनफील्ड बना रखे थे। इसके चलते बटालियन को आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा था।
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राजोरी को कबायलियों से मुक्त कराने पर मिला था परमवीर चक्र

अवरोधक इतने मजबूत थे कि टैंक भी आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। इस मुश्किल घड़ी में 37 असाल्ट फील्ड कंपनी के सेकेंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे, जो 4 डोगरा रेजीमेंट के साथ थे, उन्होंने दिलेरी के साथ सोना के आगे बढ़ने के लिए अवरोध हटाए।

जब उनकी टुकड़ी माइनफील्ड हटा रही थी तो दुश्मन द्वारा दागे मोर्टार से हमारे दो जवान शहीद हो गए। पांच जवान घायल हो गए, जिनमें राणे भी शामिल थे। इसके बावजूद राणे और उनकी टुकड़ी ने रास्ते को साफ करने का काम जारी रखा और शाम तक पूरा कर लिया। साथ ही टैंकों को राजोरी की आगे बढ़ने के लिए रास्ता खोल दिया।

नौ अप्रैल को पूरे दिन राणे तथा उनके जवान माइन हटाते रहे। जहां कहीं भी रास्ता उपयुक्त नहीं था, तो टैंकों को निकालने के लिए दूसरे रास्ते बनाए। उस समय दुश्मन आसपास के पहाड़ों पर बैठकर सभी रास्तों की निगरानी कर रहे थे। इसके बावजूद राणे टैंक में बैठकर अवरोध के पास गए और रेंगते हुए उसे हटा दिया।

11 अप्रैल को उन्होंने चिंगस तक रास्ता टैंकों के लिए खोल दिया। यही नहीं, राणे ने भारतीय सेना को राजोरी की तरफ बढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस वीरतापूर्ण कार्य के लिए उन्हें परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया।

उनके प्रशंसा पत्र में उल्लेख है कि सेकेंड लेफ्टिनेंट राणे के फौलादी इरादों और अथक प्रयासों से ही सेना चिंगस तक पहुंचने में सफल हो पाई थी। शहर के गुज्जर मंडी स्थित एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) को राणे हवाई पट्टी का नाम इस शहर के रक्षक के सम्मान में दिया गया है।
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