यूरिया खाद के बढ़ते प्रयोग और इसका फसलों और पर्यावरण पर पड़ने वाला असर कम करने की कवायद शुरू कर दी गई है। अन्य राज्यों की तर्ज पर रियासत में भी अब नीम कोटड खाद लाने की तैयारी कर ली गई है।
अभी तक प्लेन यूरिया का इस्तेमाल ही होता है। नीम कोटड यूरिया के इस्तेमाल करने पर खाद की 25 फीसदी खपत भी कम हो जाएगी। यह पर्यावरण फ्रेंडली भी होगी। कुछ ही महीनों में यह खाद स्टोर पर उपलब्ध होगी।
कृषि उत्पादन विभाग के आयुक्त सचिव मुश्ताक बुखारी का कहना है कि नए साल में खाद के रूप में यह नया प्रयास होगा, ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।
मौजूदा समय में सफेद रंग वाली यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से पर्यावरण काफी प्रदूषित और जहरीला हो रहा है। यही नहीं, फसल में इसका छिड़काव करने के बाद पैदावार पर भी असर पड़ता है।
खेतों में यूरिया की 25 फीसदी खपत भी इससे कम हो जाएगी। इसके लिए खाद निगम से बात कर ली गई है। रियासत में यह खाद लाने की तैयारी कर ली गई है।
धीरे-धीरे प्लेन यूरिया को खत्म कर दिया जाएगा और इसी का इस्तेमाल होगा। यह फसलों के लिए भी लाभदायक होगा। पैदावार पर पौष्टिकता में भी कमी नहीं आएगी और असर भी अधिक होगा।
जैविक खेती पर भी जोर
आयुक्त सचिव का कहना है कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को ट्रेनिंग दी जा रही है और जागरूक किया जा रहा है।