वयोवृद्ध मुल्कराज वोट को फिदायीन हमलों का असली जवाब मानते हैं। हरि सिंह चौक स्थित मतदान केंद्र पर आने के लिए उन्हें रिश्तेदारों का सहारा लेना पड़ा। 95 वर्षीय इस बुजुर्ग ने वयस्क होने के बाद से हर चुनाव में मतदान किया है। चुनाव का बदला स्वरुप उन्हें खटकता है।
पहले प्रत्याशी वोट से पहले मदद में नोट भी मांगता था। तब उम्मीदवारों के पास आज जैसा अकूत धन नहीं होता था और बदले हालात में आज चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों को प्रत्याशियों के खर्चों पर नजर रखनी पड़ती है।
पहले वोटरों की मदद से चुनाव लड़े जाते थे और अब कई प्रत्याशियों पर वोटरों को खरीदने के आरोप लगते हैं। अब मतदान पर पाकिस्तान की टेढ़ी नजर ने भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था को आयोग की मजबूरी बना दिया है।
शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सांबा से कैंप गलाड के रास्ते में सड़क किनारे सेना ने दो बड़े कैंप स्थापित किए। इस कैंपों में बड़े-बड़े टैंक और तोपें भी दिखीं। बार्डर का इलाका होने के कारण खेतों में बंकर पहले से बने हैं।
सबसे संवेदनशील चरण था
जम्मू कश्मीर में पहले के तीन चरणों में भारी मतदान के बाद आतंकी संगठनों और पाकिस्तान सेना में मौजूद आतंकियों से संरक्षकों की बौखलाहट बढ़ी। लिहाजा बार्डर इलाके में किसी भी खतरे से निपटने के लिए सेना ने पूरा इंतजाम कर रखा था।
मतदान केंद्रों पर तैनाती के लिए असम और पूर्वोत्तर राज्यों से सीआरपीएफ की टुकड़ी भी मंगाई गई जिन्हें आतंकवाद से निपटने का खासा अनुभव है। बार्डर के कैंप गलाड स्थित मतदान केंद्र पर तैनात सीआरपीएफ के सीओ राकेश कुमार ने बताया उन्हें मतदाताओं का अच्छा सहयोग मिला।
पूर्व सरपंच अनिल चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान सीधी लड़ाई से बचता है। इसलिए अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती और सेना की तैयारी के बाद मतदान में खलल की आतंकी कोशिश बंद हो जाती है।
पाकिस्तानी साजिश का करार जवाब
आतंकी छिपकर सुरक्षा के दृष्टिकोण से कमजोर इलाकों को निशाना बनाते रहे हैं। वोटरों ने भारी मतदान कर पाकिस्तानी साजिश का करार जवाब दिया है। चुनाव आयोग ने भी अधिक मतदान को प्रोत्साहित करने के लिए बार्डर इलाके में माडल मतदान केंद्र बनाए थे जहां मतदाताओं को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए टेंटों में कुर्सियां लगाई गई। पेयजल और मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध थी।
कश्मीर की 16 सीटों पर भी मतदाताओं ने आतंक का खामोश उत्तर दिया। अनंतनाग में वोट प्रतिशत पिछले चुनाव के 41.23 फीसदी से घटकर 38.67 पर अटका लेकिन अलगाववादियों के प्रभाव क्षेत्र हब्बाकदल और अमीरा कदल में मतदान में दस फीसदी से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया।
डोरू, कोकरनाग और वाची में मतदान के प्रतिशत में मामूली कमी आई लेकिन 18 में से 14 सीटों पर भारी मतदान से जम्हूरियत की जीत का परचम फिर बुलंदियों पर लहराया।