सियासी बंदिशों ने भाजपा और पीडीपी को गठबंधन के शीघ्र एलान को मजबूर कर दिया है। अनौपचारिक वार्ता अंतिम दौर में है और न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएपी) का खाका लगभग तैयार कर लिया गया है। क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर विकास को केंद्र में रखकर सीएपी तैयार हो रहा है।
इसका एलान शीघ्र संभव है। दिल्ली चुनाव के कारण भाजपा गठबंधन में जल्दबाजी नहीं दिखा रही थी, लेकिन, राज्यसभा चुनाव की दस्तक ने गठबंधन के लिए फरवरी के पहले सप्ताह की सीमा रेखा खींच दी है।
राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना 21 जनवरी को जारी हो जाएगी और चुनाव 7 फरवरी को संपन्न होंगे। राज्यसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने को प्रयासरत भाजपा के लिए पीडीपी से गठबंधन पर जल्द फैसला लेना जरूरी हो गया है।
भाजपा-पीडीपी की वार्ता अंतिम दौर में
पीडीपी और भाजपा के गठबंधन से दोनों दलों को राज्यसभा की दो-दो सीटें हासिल हो सकती हैं तथा नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो सकता है। नतीजतन अब दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई है। पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि भाजपा की ओर से महासचिव राम माधव वार्ता कर रहे हैं।
इस अनौपचारिक बातचीत में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर भी विस्तार से चर्चा हुई है। पीडीपी ने 2002 में भी कांग्रेस के साथ सरकार बनाने से पहले न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय किया था। इस बार भी इस दिशा में प्रारूप बनाने का काम अंतिम दौर में है। जल्द ही स्थिर सरकार की दिशा में ठोस फैसला सामने आने की उम्मीद है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कोर ग्रुप की राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ बैठक के बाद पीडीपी को साफ संदेश दे दिया गया था कि जम्मू क्षेत्र को तीन साल के लिए मुख्यमंत्री का पद देने के मामले में कोई समझौता संभव नहीं है। जम्मू के वोटरों ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए वोट किया है।
जम्मू के साथ 25 साल से भेदभाव के खिलाफ जनादेश है। इसलिए जनादेश की अवहेलना नहीं की जा सकती। इस तरह का जनादेश पीडीपी को कश्मीर घाटी में मिला है। लिहाजा, तीन-तीन साल के लिए सत्ता के बंटवारे पर सहमति बन रही है।
पहले मुफ्ती बाद में भाजपा का सीएम
पहले तीन साल पीडीपी के खाते में जा सकते हैं। पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद के सीएम बनने पर भाजपा का डिप्टी सीएम होगा और बाद में भाजपा के सीएम के साथ पीडीपी का उप मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है।
अफस्पा पर पीडीपी और 370 पर भाजपा झुकी
गठबंधन में बाधक विवादास्पद मुद्दों को परे रखा जा रहा है। अफस्पा पर सेना के साथ विचार विमर्श की बात कहकर मामले को टाला जा सकता है। भाजपा का तर्क है कि यह सीधा सेना से जुड़ा मामला है। अनुच्छेद 370 पर भाजपा यथा स्थिति बनाए रखने पर सहमत है। इस तरह अफस्पा पर पीडीपी और अनुच्छेद 370 पर भाजपा झुक रही है।
सरकार गठन से पहले दिल जीतने की मुहिम
सरकार गठन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीरियों का दिल जीतने की कवायद तेज कर दी है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से कश्मीरी बाढ़ पीड़ितों के बैंक एकाउंट में सीधे मदद राशि आने लगी है। दीपावली पर मोदी ने श्रीनगर में यह वादा किया था जो अब पूरा हो रहा है।
इस मद में 60 करोड़ रुपये पीड़ितों के खाते में आ गए हैं। सौ करोड़ रुपये और आएंगे। मृतकों के परिवार को दो लाख, ध्वस्त पक्के मकान के लिए एक लाख और कच्चे मकान के लिए 50 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।