केरल में तय समय से देरी से दस्तक देने वाला मानसून रियासत में भी पहुंचने में थोड़ी लेटलतीफी कर सकता है। केरल से होते हुए राज्य में मानसून के थोड़ा कमजोर पड़ सकता है। केंद्र सरकार के सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए अभी से तैयारी में जुट जाने से इसका असर राज्य पर भी दिखेगा। केंद्र ऐसे हालात में बिजली, डीजल और बीज पर सब्सिडी देने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में मानसून पर स्थिति ज्यादा साफ होगी। पिछले साल रियासत में पांच जुलाई को मानसून ने दस्तक दी थी। अमूमन मानसून राज्य में जुलाई के पहले हफ्ते या इससे थोड़ा आगे पहुंचता है। शेर-ए-कश्मीर कृषि एवं विज्ञान विश्वविद्यालय की वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मीनाक्षी गुप्ता का कहना है कि मानसून के देरी से पहुंचने पर खेतीबाड़ी पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
पिछले साल मानसून भरपूर आया था। जिसमें राज्य के लोगों को बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ा। केरल से आगे चलने पर ही मानसून पर स्थिति साफ होगी। उत्तर भारत से होते हुए मानसून राज्य तक पहुंचता है। जिससे वह उसके कमजोर पड़ने की आशंका ज्यादा रहती है। इस बीच शनिवार को राज्य में मौसम खुश्क रहने से जम्मू संभाग के अधिकांश इलाकों में पारे ने फिर जोर पकड़ लिया।
जम्मू में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री रहा। रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री कम 25.6 और न्यूनतम तापमान 11.9 डिग्री सेल्सियस रहा। श्री अमरनाथ गुफा के बेस कैंप पहलगाम में अधिकतम तापमान 20.5 और न्यूनतम 7.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
इसी तरह लेह में अधिकतम तापमान 19.2, न्यूनतम 6.4, कारगिल में अधिकतम 15.2, न्यूनतम 6.2 और गुलमर्ग में अधिकतम 9.0 और न्यूनतम 4.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले चौबीस घंटों में कश्मीर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। लेकिन जम्मू और लेह में मौसम खुश्क रहेगा।