भारत-पाक अंतराष्ट्रीय सीमा पर तनाव के बाद कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में भी किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। पिछले साल हुई फसल की बर्बादी का मुआवजा तो मिला नहीं, लेकिन इस बार फिर फसल लगाने का समय हुआ तो पाकिस्तान ने आग उगलना शुरू कर दिया है। ऐसे में किसानों के सामने भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। आरएसपुरा सेक्टर में गोलाबारी के बाद से ही हीरानगर सेक्टर के सीमा से सटे ग्रामीण दहशत में हैं।
ग्रामीणों को एक ओर जहां परिवार की सुरक्षा का डर सता रहा है, वहीं साल भर के खर्च के लिए फसल कैसे लगेगी, यह सोच भी भारी पड़ रही है। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने हीरानगर सेक्टर के पहाड़पुर, मेहराजपुर, मनियारी, छन्न लाल दीन, बोबिया और रठुआ गांव का दौरा किया। इस दौरान किसानों ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने तो कुछ खास किया नहीं। भाजपा ने बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन वह पिछली सरकार से भी गई गुजरी साबित हुई।
भाजपा ने लोगों की भावनाओं से खेलने का काम किया है। इसलिए सीमावर्ती ग्रामीणों ने इस न सिर्फ रियासत की भाजपा-पीडीपी सरकार, वरन केंद्र सरकार के प्रति भी काफी रोष है। भाजपा ने हर सीमावर्ती ग्रामीण को सुरक्षित स्थानों पर पांच-पांच मरले के प्लाट और हर गांव में बंकर की सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद वह सीमावर्ती ग्रामीणों को भूल गई है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों ने अपनी जिंदगी के कई साल गांव से पलायन और फिर वापसी करते हुए ही बिता दी है।