राजनीतिज्ञों, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों और भू माफियाओं की मिलीभगत से रियासत के ज्यादातर इलाकों में हुए भूमि घोटाले की धीमी जांच पर अदालत ने असंतोष जताया है। अदालत ने विजिलेंस डायरेक्टर और सिट को 17 दिसंबर से पहले जांच पूरी करने को कहा है। यदि विजिलेंस ऐसा करने में असफल होता है तो अगली तिथि पर डायरेक्टर खुद खंडपीठ के समक्ष पेश हों।
चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने रोशनी घोटाले में सीबीआई जांच के लिए दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि राज्य सतर्कता आयोग ने विजिलेंस आर्गनाइजेशन को कई एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। साथ ही चार विशेष जांच टीमें (सिट) बनाकर सबसे बड़े भूमि घोटाले की जांच करने को कहा था।
एसएसपी विजिलेंस के नेतृत्व में जम्मू-सांबा जिला टीम और उधमपुर के एसएसपी के नेतृत्व में टीम बनाई गई। बडगाम और श्रीनगर के लिए एसएसपी श्रीनगर के नेतृत्व में टीम बनीं। अदालत ने पाया कि इस मामले में सिट बनाने के अलावा गंभीरता से कुछ काम नहीं हुआ। कुछ मामलों में एफआईआर का काम पूरा हुआ तो कुछ में अभी बाकी है।
खंडपीठ ने कहा, ऐसा लगाता है कि जांच एजेंसियां और विजिलेंस इस मामले की जांच को लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसा महसूस होता है कि जान बूझकर मामले की जांच धीमी की जा रही है, ताकि आरोपी प्रमाणों को समाप्त कर सकें। इस मामले में कागजी प्रमाण इकट्ठा करने में दो माह से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए था।
यदि विजिलेंस ने गंभीरता से जांच की होती तो अभी तक इस मामले में चालान पेश हो जाता और आरोपी सलाखों के पीछे होते। अदालत ने पाया कि दर्ज एफआईआर में जिन बड़े लोगों के नाम नहीं आए हैं, उन्हें भी इसमें शामिल किया जाए। साथ ही विजिलेंस डायरेक्टर और सभी सिटों को निर्देश दिए कि 17 दिसंबर से पहले जांच पूरी की जाए।
अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जरूरत पड़े तो आरोपियों की संपत्ति, बैंक अकाउंट भी कुर्क किए जाएं। खंडपीठ ने कहा कि यदि इसके बावजूद विजिलेंस डायरेक्टर धीमी जांच करते हैं तो कानून के पास ऐसे अधिकारियों के लिए कार्रवाई के अन्य तरीके हैं। जेएनएफ