पिछली दो फसलों की तबाही देख चुके किसानों ने जम्मू की विश्व प्रसिद्ध बासमती को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का मुख्य हथियार बनाया है। करीब अढ़ाई लाख परिवार अपनी हालत में सुधार लाने के लिए बासमती की बंपर पैदावार करने में जुट गए हैं। पिछले एक साल से बारिश जमकर हुई है।
ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि इस साल भी अच्छी बारिश होगी। हालांकि किसान यह भी दुआ कर रहे हैं कि बेमौसम बारिश न हो, जिससे सारी मेहनत बेकार जाए। कृषि विभाग भी किसानों के लिए बासमती की फसल की बेहतर पैदावार के लिए प्रयास कर रहा है, क्योंकि जम्मू की बासमती की विश्व में काफी मांग है, जिसकी खुशबु इसके अधिक दाम देती है।
इसलिए किसानों की कोशिश है कि अधिक से अधिक बासमती उगाई जाए, ताकि इसकी बंपर पैदावार हो और किसानों को अधिक से अधिक कमाई हो।
40 हजार हेक्टेयर पर जीतोड़ मेहनत
जम्मू, सांबा, कठुआ, अखनूर, आरएस पुरा के 40 हजार हेक्टेयर पर बासमती की फसल लगाने की तैयारी की जा रही है। इसमें 370 रणवीर बासमती सबसे अधिक शामिल है। इसके बाद पूसा, 1509 सहित फाइन बासमती की कई फसलें लगाई जा रही हैं। प्रति क्विंटल आमतौर पर पैदावार आठ से दस क्विंटल होती है, लेकिन इस बार किसानों ने लक्ष्य 15 क्विंटल तक रखा है।
हर साल बासमती की पनीरी की बिजाई मई के अंत में की जाती है, लेकिन किसानों ने मई के शुरुआत में ही बिजाई कर दी। जून के मध्य में लगाई जाने वाली बासमती इस बार मई के अंत में लगाने की तैयारी है। जिन किसानों ने बिजाई नहीं की, वो अगले एक-दो दिन में करेंगे।
इस बार ईरान न आए आगे
पिछले वर्ष किसानों की बासमती विदेश में नहीं जा सकी। कुछ तो बाढ़ की मार पड़ी, कुछ ईरान में हुई बंपर पैदावार किसानों के आगे आ गई। पिछले वर्ष विश्व को 40 फीसदी सप्लाई ईरान ने की, जबकि कई अन्य देशों में पाकिस्तान, अरब देशों ने भी बासमती की सप्लाई की।
इससे भारत में जम्मू से बासमती की सप्लाई कम हुई। इसकी वजह से किसानों की बासमती जो 5 हजार प्रति क्विंटल बिकती थी, वह दो हजार क्विंटल तक बिकी। किसानों को उम्मीद है कि इस वर्ष जम्मू में ही बासमती बेहतर हो, ताकि वह पूरे विश्व में इसकी सप्लाई कर सके।
गांव की जगह बासमती निर्यात जोन क्यों नहीं
सरकार से भी आस
आरएस पुरा राइस ग्रोवर्स एसोसिएशन के प्रधान चौधरी देव राज का कहना है कि बासमती की 370 किस्म की बासमती पूरे विश्व में मानी जाती है। इसके निर्यात पर पहले प्रतिबंध था, बाद में इसे हटाया गया, लेकिन फिर से इस पर प्रतिबंध लगाया गया। सरकार को चाहिए कि इस पर से प्रतिबंध हटाए।
हालांकि कृषि विभाग के निदेशक एसएस जंबाल का कहना है कि प्रतिबंध नहीं लगा हुआ। पिछले वर्ष अन्य देशों में बंपर पैदावार से यहां की बासमती का इतना निर्यात नहीं हुआ। हालांकि जंबाल का कहना है कि विदेश में बासमती भेजने के लिए विभाग कई प्रयास कर रहा है।
बासमती गांव की जगह बासमती निर्यात जोन क्यों नहीं
सरकार ने जम्मू में बासमती गांव बनाने की घोषणा की है, लेकिन बासमती तीन जिलों में होती है। चौधरी देव राज और कृषि उद्यमिता विकास संगठन के प्रधान कुलभूषण खजुरिया का कहना है कि जब बासमती तीन जिलों में होती है, तो फिर बासमती गांव क्यों बनाए जा रहे हैं।
बासमती निर्यात जोन क्यों नहीं बनाया जाता, जिसमें तिनों जिलों की बासमती को शामिल किया जा सके। वहीं अभी तक सरकार की ओर से बासमती गांव बनाने पर भी कोई काम शुरू नहीं किया जा सका है। कृषि विभाग के निदेशक एसएस जंबाल का कहना है कि अगले दो-तीन दिन तक इसके ऊपर विचार किया जाएगा।