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'उस वक्त मुझे दर्द की नहीं थी परवाह'

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आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई में कांस्टेबल आदित्य शर्मा भी जख्मी हुए हैं। उनके दाएं हाथ की बीच की उंगली में गोली लगी है। हालांकि, घाव काफी था, लेकिन इसकी परवाह किए बिना अधिकारियों के पूछने पर उन्हें किस्सा सुनाने लगे। अधिकारी ने जब उनके दर्द के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, उस वक्त मुझे दर्द की परवाह नहीं थी।
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कठुआ के राजबाग थाने में आतंकी हमले में सब डिवीजन पुलिस अफसर (एसडीपीओ) बार्डर चड़वाल दिवाकर सिंह और सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (एसजीसीटी) प्रेम सिंह को कठुआ जिला अस्पताल से जीएमसी लाया गया है। दिवाकर त्रिकुटानगर और प्रेम सिंह माहौर रियासी का रहने वाले हैं। प्रेम सिंह जम्मू-कठुआ रेंज के डीआईजी शकील बेग के पीएसओ हैं।

दिवाकर सिंह के बाएं कंधे पर गोली लगी है, जिससे हड्डी टूट गई है। वह बोलने की स्थिति में नहीं थे। उनके कंधे से लगातार खून बह रहा था। प्रेम सिंह की हालत भी खराब थी। उनकी बाईं जांघ में गोली लगी है। प्रेम सिंह के मुताबिक वह गेट से सटे डबल मोर्चे पर खड़े थे। तभी वहां पर गोलियों की बौछार हो गई, जिसमें वह जख्मी हो गए।
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इसके बाद अफरातफरी मच गई। प्रेम सिंह का इमरजेंसी में इलाज चल रहा था। डाक्टरों के मुताबिक उनकी हालत काफी गंभीर है।

जीएमसी में अफरा-तफरी का माहौल

आतंकी हमले में जख्मी एसडीपीओ दिवाकर सिंह और सेलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल प्रेम सिंह के जीएमसी लाए जाने की सूचना मिलते ही जीएमसी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जैसे ही पुलिस वाहन दोनों जख्मी पुलिस कर्मियों को लेकर पहुंचे डाक्टरों ने उन्हें हाथों हाथ ले लिया। स्वास्थ्य मंत्री भी घायलों की गाड़ी के साथ अस्पताल में आ धमके।

सारी व्यवस्था ठीक है, यह देखने के साथ ही उन्होंने दोनों घायलों का इलाज जल्द शुरू करने की हिदायतें दीं। जीएमसी की इमरजेंसी पुलिस की छावनी में तब्दील हो गई। कुछ ही मिनटों में पुलिस के उच्चाधिकारी एकाएक आने लगे। आईजी ट्रैफिक जेपी सिंह, एसपी एसकेएस चौहान, एसडीपीओ हरजीत सिंह, एसएचओ दिलीप सिंह भी हाल जानने पहुंचे।

इसके साथ ही पूर्व राज्य मंत्री सुरजीत सिंह सलाथिया, पूर्व मंत्री रमण भल्ला भी अस्पताल आए। उन्होंने भी घायलों का हाल जाना। अब तक माहौर, रियासी से जख्मी प्रेम सिंह के परिवार के लोग भी आ चुके थे।

मंत्रियों ने उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद जीएमसी में देर शाम तक उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह और पुलिस महानिदेशक के पहुंचने का इंतजार होता रहा। घायलों को देखने के लिए तीमारदार भी जुटे रहे।
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ढाई घंटे प्रभावित रहा रेल यातायात

राजबाग पुलिस थाने पर शुक्रवार सुबह हुए आतंकी हमले के दौरान जम्मू से लेकर कठुआ तक रेल यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान कई ट्रेनें घंटों देरी से निकलीं और जम्मू पहुंची। हमले के दौरान सांबा और कठुआ में अधिकांश ट्रेनों को रोक दिया गया था। स्टेशन मैनेजर रेलवे जम्मू अश्विनी कुमार के अनुसार सुबह 9:30 से 11:55 बजे तक रेल यातायात प्रभावित रहा।

उनके अनुसार जम्मू से निर्धारित समय पर अधिकांश ट्रेनों को छोड़ा गया, लेकिन आउटर पर सांबा और कठुआ में ट्रेनों को रोका गया था। आतंकी हमले के दौरान रास्ते में फंसे रेल यात्रियों की सांसें अटकी रहीं। हमले की सूचना मिलने पर रेल प्रशासन की ओर से सभी ट्रेनों को कठुआ स्टेशन पर सुबह रोक दिया गया था।

इससे सभी ट्रेनों तय समय से कई घंटे देरी से चलीं। कठुआ रेलवे स्टेशन पर सुबह सात बजे बंद किया गया रेल ट्रैफिक दोपहर बारह बजे के बाद बहाल हो सका। स्टेशन पर आनंद विहार जम्मू तवी तीन घंटे से अधिक समय तक रुकी रही। इसे जम्मू 9:40 बजे पहुंचना था। यह ट्रेन दोपहर 1:40 बजे पहुंची।

इसी तरह मालवा एक्सप्रेस डाउन अपने निर्धारित समय से तीन घंटा देरी 12:45 पर कठुआ रेलवे स्टेशन से गुजरी। स्वराज एक्सप्रेस मुंबई से जम्मू एक घंटा देरी से आई। जम्मू रेलवे स्टेशन से स्वराज एक्सप्रेस 11.15 बजे के बजाय 12 बजे रवाना हुई। बेगमपुरा एक्सप्रेस को माधोपुर में तीन घंटे के लिए रोका गया।

चेन्नई एक्सप्रेस सवा घंटा देरी से कठुआ पहुंची। जम्मू रेलवे स्टेशन पर बनारस तय समय से डेढ़ घंटा देरी से दोपहर दो बजे पहुंची। हमले के दौरान सुबह अधिकांश गाड़ियों को जम्मू से निकाल दिया गया था, लेकिन उन्हें सांबा और आउटर में रोका गया। आतंकी हमले के दौरान यात्री काफी सहमे रहे।

दिल्ली की एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। संस्था के सदस्य गौरन ने बताया कि जम्मू में उन्हें कार्यक्रम करना था। एक अन्य यात्री सुनील कुमार ने कहा कि आतंकी हमलों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर राज्य में सुरक्षा बलों को दिए गए विशेष अधिकारों को नहीं हटाना चाहिए।
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