भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा का नाम सुनते ही किसी भी शख्स के जेहन में सबसे पहले गोलीबारी और आतंकी हमलों की डरावनी तस्वीर ही उभरती है। आतंक और नफरत की इस तस्वीर को बदलने और लोगों के जेहन से डर को निकालने के लिए कठुआ जिला प्रशासन की ओर से वीरवार को बॉर्डर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। यह आयोजन बार्डर की फ़िज़ा को बदलने में कामयाब कदम साबित हो रहा है।
अपनी तरह के इस पहले आयोजन का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल सिंह ने किया। पहले ही दिन बारह हजार से अधिक लोगाें ने पहुंचकर आयोजन को हाथों-हाथ लिया। वहीं, आतंक को शिकस्त देने के लिए कलाकारों ने सीमा पर ऐसी प्रेमधुन छेड़ी कि हर कोई उनका दीवाना हो गया। फेस्टिवल में गीत-संगीत का ऐसा समां बंधा कि वहां पहुंचे लोग दहशत को भूल गए और जब वे वहां से जाने लगे तो वे दिल ही दिल में दोनों मुल्कों में अमन-चैन के लिए दुआ कर रहे थे।
मनोरंजन से भरपूर आयोजन के दौरान हंसी ठिठोली से लेकर सरकारी योजनाओं के अवलोकन, रोजगार के अवसर और मनोविनोद के ढेरों इंतजामों ने लोगों को फेस्टिवल का मुरीद बना दिया। अमूमन सरकारी मेले जैसे आयोजन में लोगाें की संख्या का टोटा रहता है, लेकिन हीरानगर मिनी स्टेडियम में स्थापित किए गए सौ से अधिक स्टॉल देखने वालों का तांता लगा रहा।
बीएसएफ के म्यूजिकल बैंड की स्वर लहरियां हों या फिर गोजरी नृत्य और डोगरी गीतड़ू की प्रस्तुतियां। दर्शक दीर्घा तो घंटो लगातार मंत्रमुग्ध रही। लघु नाटक के माध्यम से सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी सार्थक रहे। जिला सूचना विभाग के कलाकारों ने भी लोगों का खूब मनोरंजन किया।
हर सीमावर्ती गांव में बनेगा एक टूरिस्ट हट
बॉर्डर फेस्टिवल के बारे में जिला उपायुक्त डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने कहा कि सितंबर 2014 में चौदह हजार से अधिक लोगों को गोलीबारी की वजह से पलायन करना पड़ा था। बार्डर फेस्टिवल के माध्यम से इस माहौल को बदलने और बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला उपायुक्त ने कहा कि सीमा से सटे हर गांव में कम से कम एक टूरिस्ट हट स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बॉर्डर सफारी और बॉर्डर होम स्टे जैसी सुविधाओं को भी सरहदी इलाकों में सैलानियों को आकर्षित करने के लिए ही शुरू किया गया है।