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मौत का पैगाम ला रहा 'किसान क्रेडिट कार्ड'

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फसलों की तबाही अब विकराल रूप ले रही है। इसकी चपेट में किसान और उनके परिवार इतनी बुरी तरह से फंस चुके हैं कि जिंदगी में जीने की चाहत कम और मरने का इंतजार ज्यादा हो रहा है। खाने के लाले और बच्चों की पढ़ाई तक इसके कारण छूट गई है। पिछले सात महीने में दो फसलों को अपनी आंखों के सामने तबाह होते देखकर किसानों की नींद उड़ गई है।
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विशेष तौर पर किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन लेने वाले किसानों की हालत भयानक खौफ की तरह है। ‘अमर उजाला’ की टीम ने ऐसे ही एक किसान के घर पहुंचकर उसका हाल जानने की कोशिश की तो कर्ज के डर के आंसू और बच्चों की पढ़ाई की चिंता फूट-फूट बाहर निकली। गांव सुहांजना के रहने वाले मेजर राम के चार लड़के हैं।

एक कमरे वाला छोटा सा कच्चा मकान है। घर में एक दो मवेशी ही हैं। एक साल पहले मेजर राम ने किसान क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये लोन लिया। इसमें कुछ लोन चुकाया भी, लेकिन पिछले सात महीने में दो फसलें खराब हो गईं।
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'बेटे को खेत में मरते देखा'

मेजर का कहना है कि फसलों के दम पर लोन लिया। सोचा कि पैसों से घर बना लूंगा और फसल को बेच कर कर्ज चुका दूंगा, लेकिन पहले धान की फसल तबाह हो गई और अब गेहूं। दो लड़कों ने अभी छह महीने पहले ही पढ़ाई छोड़ दी। अब फैक्टरी में काम कर रहे हैं। एक ने नौवी और दूसरे ने दसवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी। अभी दो लड़कों में एक आठवीं और दूसरा छठी कक्षा में पढ़ते हैं।

80 साल की उम्र पार कर चुकी पुष्पा देवी के तीन बेटों में से दो की मौत हो चुकी है। पूरी तरह से खेतीबाड़ी पर निर्भर पुष्पा देवी अपने पति को कई साल पहले खो चुकी है। एक बेटे को खेत में सांप ने काट लिया और उसकी मौत हो गई। एक बेटे की हार्ट अटैक से चार साल पहले ही मौत हो गई।

चार साल पहले मरने वाला पुष्पा देवी का बेटा सुरजीत भी खेतीबाड़ी करता था, जिसके तीन बच्चे हैं। पुष्पा देवी बताती हैं कि विधवा बहु और तीन बच्चों का खर्च चलाना खेतीबाड़ी पर निर्भर है, लेकिन पिछली दो फसलें नष्ट होने से अब दो वक्त की रोटी जुटा पाना भी मुश्किल है।
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मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं

गांव सुहांजना के सरपंच कुलभूषण खजूरिया का कहना है कि दस दिन पहले ही सरकार को अवगत करा दिया था कि यदि सरकार किसानों को तत्काल प्रभाव से राहत नहीं देती तो किसान आत्मदाह को मजबूर हो जाएंगे।

किसानों की हालत से उनकी सेहत बिगड़ेगी और कठुआ में ऐसा हो भी गया। यहां एक किसान की कर्ज की वजह से मौत हो गई। सरकार को चाहिए कि किसानों के लिए तत्काल प्रभाव से कैश मुआवजा जारी करे।

एक महीने तक राहत की उम्मीद नहीं
अगले एक महीने तक किसानों को बाढ़ और बारिश की वजह से फसलों के नुकसान की राहत मिलते नजर नहीं आ रही। बेशक कृषि विभाग एक-दो दिन में नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने का दावा ठोक रहा हो, लेकिन कागजी प्रक्रिया कुछ और ही बयां कर रही है।

अतिरिक्त उपायुक्त कल्याण सिंह परिहार का कहना है कि गिरदावरी होने के बाद ही नुकसान की रिपोर्ट बनेगी। फसलों के नुकसान की रिपोर्ट गिरदावरी होने के बाद ही बनती है।
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