बीसीसीआई में खींचतान के चलते रियासत के क्रिकेट मैदानों के सर्वे का मामला लटक गया है। गत सितंबर में बाढ़ के कारण श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम और जम्मू के जीजीएम साइंस कालेज की हास्टल ग्राउंड को भारी नुकसान पहुंचा था।
श्रीनगर स्टेडियम का अधिकांश हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन तीन माह बीत जाने पर भी इन मैदानों पर नुकसान का जायजा लेने बीसीसीआई की टीम नहीं पहुंच पाई है। नुकसान की रिपोर्ट तैयार न होने से क्रिकेट मैदानों के पुनर्निर्माण में देरी हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन अरविंदर सिंह मिक्की का कहना है कि बीसीसीआई टीम के सर्वे के बाद ही मैदानों पर बाढ़ के नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि रियासत के क्रिकेट मैदानों पर पर्याप्त ढांचा न होने के कारण जेकेसीए के कोचिंग कैंप को दूसरे राज्य में शिफ्ट करना पड़ा था। यही नहीं, बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए मैदानों के कारण राज्य में होने वाले चार रणजी के मुकाबलों को भी दूसरे राज्यों में शिफ्ट कर दिया गया है।
पिछले साल घरेलू मैदान पर खेलने का जेकेसीए क्रिकेटरों को काफी लाभ मिला था। रणजी में राज्य टीम ने पहली बार क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करके इतिहास रचा था, लेकिन इस बार कोचिंग कैंपों के साथ घरेलू मैदान पर कोई भी मुकाबला आयोजित नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय क्रिकेट मैदानों के पुनर्निर्माण और उचित ढांचा न होने के कारण राज्य के क्रिकेटरों को घरेलू मैदानों का लाभ नहीं मिल पाएगा। बाढ़ से श्रीनगर के क्रिकेट मैदान को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा है।
जेकेसीए की ओर से मैदान पर सेंट्रल पिच का निर्माण कराया गया है, लेकिन वह नाकाफी है। राज्य टीम में बिशन सिंह बेदी के बाद चीफ कोच की भूमिका निभा रहे टीम इंडिया के आल राउंडर रहे सुनील जोशी टीम को दूसरे राज्यों में प्रशिक्षण दे रहे हैं।