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तो अमरनाथ यात्रा मार्ग पर नहीं लगेंगे लंगर

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श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की नीतियों के खिलाफ लंगर लगाने वाले लामबंद हो गए हैं। उनका कहना है कि अगर बोर्ड अधिकारियों ने अपने अड़ियल रवैये में नरमी लाकर नए नियमों में संशोधन नहीं किया तो इस बार यात्रा के दौरान वे लंगर नहीं लगाने पर सोच सकते हैं। उन्होंने बालटाल, दोमेल, चंदनबाड़ी से कई लंगर शिफ्ट करने के फैसले का विरोध किया है।
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लंगर स्थल पर दस से अधिक यात्रियों को ठहराने के लिए कैंप निदेशक से अनुमति लेने के निर्णय की भी खिलाफत की है। लुधियाना से पंजीकृत कार्यालय श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गनाइजेशन (साबलो) से महासचिव राजन गुप्ता ने बताया कि बोर्ड की ओर से इस बार बालटाल से सात, दोमेल से दो और चंदनबाड़ी से दो लंगरों को यात्रा रूट से शिफ्ट किया जा रहा है।

साबलो हर साल बालटाल और पहलगाम रूट पर सौ से अधिक लंगर लगाकर शिव भक्तों की सेवा कर रहा है, लेकिन इस बार एक फरमान जारी करके उन्हें लंगर स्थल पर दस से अधिक यात्रियों को ठहराने के लिए कैंप निदेशक से अनुमति लेने को कहा जा रहा है। ऐसे में वे यात्रियों की सेवा करेंगे या अनुमति के लिए भटकेंगे।
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गत चार मार्च को हुई बैठक में बोर्ड अधिकारियों ने अपने अड़ियल रवैये को अपनाए रखा और लंगर वालों की कोई सुनवाई नहीं की गई।
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स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के लिए भीड़

लंगर वालों पर बेवजह सख्ती करके जुर्माने लगाने का प्रावधान कर दिया गया, जिसमें संशोधन किया जाए। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2014 की यथास्थिति पर ही सारी शर्तें लागू हों। यात्रा और लंगर वालों की सुरक्षा अर्द्धसैनिक बलों के अलावा सेना के हवाले की जाए।

वर्ष 2012 में चंदनबाड़ी, वर्ष 2013 में शेषनाग और वर्ष 2014 में बालटाल में राज्य पुलिस की मौजूदगी में लंगर वालों को निशाना बनाया। उन्होंने साफ किया कि अगर बोर्ड ने अपने नए नियम वापस नहीं लिए तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके अलावा अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

आगामी दो जुलाई से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा के पंजीकरण प्रक्रिया में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पाने के लिए शहर के अस्पतालों में लोगों की भीड़ पहुंच रही है। प्रमाणपत्र के लिए नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। शहर के सरवाल अस्पताल में सबसे अधिक भीड़ प्रमाणपत्र पाने के लिए पहुंच रही है।

यहां तीन सौ से अधिक यात्रियों ने स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनाए हैं। मेडिकल अफसर डा. नरेंद्र शर्मा के  अनुसार रोजाना लोग प्रमाणपत्र बनवाने पहुंच रहे हैं। राजीव गांधी अस्पताल में पचास से अधिक प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। गांधीनगर अस्पताल में भी प्रमाणपत्र के लिए लोग पहुंच रहे हैं।

हालांकि जीएमसी में प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया अभी ढीली पड़ी है। रियासत की विभिन्न पीएनबी और जेएंडके बैंक की शाखाओं में पंजीकरण प्रक्रिया जारी है।
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