दिल्ली और कटड़ा के बीच श्री शक्ति एक्सप्रेस शुरू होने के बाद अन्य ट्रेनों के भी इस रूट पर चलने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन बुधवार को ट्रेन के टनल में फंसने के बाद अब ये प्रोजेक्ट ठंड़े बस्ते में डाले जा सकते हैं।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक इस तरह की घटना भविष्य में न हो इसके लिए मामले की पूरी जांच करने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। उसके बाद ही अन्य ट्रेनों का कटड़ा तक विस्तार करने अथवा कुछ नई ट्रेनें शुरू करने के बारे में कोई फैसला किया जाएगा।
अगर रिपोर्ट में ट्रेक में कोई खराबी सामने आती है तो श्री शक्ति एक्सप्रेस को भी कुछ दिनों के लिए रोका जा सकता है।
इसी टनल ने लटकाया था प्रोजेक्ट
इसी टनल में पानी का रिसाव होने के चलते कई साल तक कटड़ा तक ट्रेन पहुंचाने का प्रोजेक्ट लटका रहा। रेल मंत्रालय द्वारा 2002 में कटड़ा तक ट्रेन पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया था।
प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाने के चलते इसे 2005 तक स्थगित कर दिया गया पर इसके बावजूद कामयाबी नहीं मिली। फिर 2008 और उसके बाद इस प्रोजेक्ट को 2013 में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
200 अधिकारियों ने दी थी हरी झंडी
नवंबर 2013 में महाप्रबंधक ने इंजन से ट्रायल किया, लेकिन कमिश्नर रेलवे सेफ्टी से मंजूरी मिलने में समय गया गया। मार्च में 200 अधिकारियों की टीम ने कटड़ा तक ट्रायल ट्रेन चलाकर इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी।
अंतत: चार अप्रैल 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमयू को हरी झंडी दिखाकर कटड़ा से ट्रेन को रवाना कर दिया। श्री शक्ति एक्सप्रेस ट्रेन 14 जुलाई सोमवार से शुरू हुई थी।
सीआरएस की मंजूरी नहीं
सूत्रों के अनुसार कमिश्नर रेवले सेफ्टी ने जनवरी में दौरा कर इस रूट में कई कमियां निकाली थीं। इसमें झज्जर पुल मं मोड़ की कमी और टनल में भी तकनीकी आपत्तियां जताईं थी।
इसके बाद 200 अधिकारियों की टीम ने दौरा कर ट्रेन चलाने की मंजूरी दे दी। अभी तक सीआरएस ने मंजूरी नहीं दी है जबकि ट्रेन शुरू करने से पहले सीआरएस की मंजूरी और सर्टिफिकेट जरूरी होती है।
डेढ़ घंटे तक फंसी रही थी ट्रेन
वैष्णो देवी के भक्तों को कटड़ा तक लेकर आने वाली श्री शक्ति एक्सप्रेस का इंजन अपने दूसरे ही सफर में हांफ गया। बुधवार को कटड़ा से पहले टनल नंबर 27 में करीब डेढ़ घंटे तक ट्रेन फंसी रही।
बारिश के कारण टनल में पानी भर गया था। टनल में पहुंचते ही ट्रेन के पहिये स्लिप होने लगे। किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका के चलते ट्रेन को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन भी हरकत में आ गया।
तीन अधिकारी करेंगे मामले की जांच
टनल में फंसी श्री शक्ति एक्सप्रेस को आगे बढ़ाने के लिए अधिक शक्ति वाले इंजन की जरूरत पड़ी। इसके लिए उधमपुर से रिलीफ बैंकर इंजन को भेजा गया। इस अतिरिक्त इंजन ने पीछे से ट्रेन को धकेला तब कहीं टनल में फंसी ट्रेन कटड़ा की ओर आगे बढ़ सकी।
एक ही बारिश के बाद ट्रेन के टनल में फंस जाने की घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। टनल में ट्रेन के फंस जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तरी रेलवे ने मामले की जांच के लिए फिरोजपुर डिवीजन के तीन अफसरों की टीम गठित की है।
टनल में ट्रेक पर भी गया था पानी
बुधवार सुबह करीब पांच बजे उधमपुर से रवाना हुई श्री शक्ति एक्सप्रेस पहले ही 40 मिनट देरी से चल रही थी। करीब साढ़े पांच बजे ट्रेन टनल नंबर 27 (कटड़ा से टनल नंबर तीन) में पहुंची और टनल में पटरी पर पानी भरा होने से अटक गई।
इंजन ट्रेन को खींच नहीं पा रहा था। ट्रेन के ड्राइवर ने ऐसे में इंजन से ज्यादा ताकत लगाने के दौरान व्हील स्लिप होने के चलते ट्रेन को टनल में ही रोक दिया। इसी दौरान जीआरपी एसपी एके महाजन की पेट्रोलिंग टीम भी वहां से गुजर रही थी।
एसपी द्वारा कटड़ा जीआरपी को मामले की सूचना दी गई। 6 बजकर 50 मिनट पर ट्रेन को टनल से निकाला गया था और 7 बजकर 10 मिनट पर ट्रेन कटड़ा पहुंची थी।