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इस नई थ्योरी से दर्द का होगा अचूक इलाज, असंतुलित दर्द निवारक एंटीबायोटिक दवाइयां बिगाड़ रहीं सेहत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 12 Sep 2018 12:37 PM IST
इन्फोग्रफिक - फोटो : सलीम
नई थ्योरी से शरीर में तमाम तरह के दर्द का इलाज आसान हुआ है। अब दर्द से राहत पाने के लिए संबंधित अंग के विशेषज्ञों के पास जाने की जरूरत नहीं। दर्द दूर भागने के लिए अब जम्मू के सरकारी अस्पतालों में भी दर्द विशेषज्ञ मुहैया हैं जो आपको दर्द से मुक्ति दिला सकते हैं।

गांधीनगर अस्पताल में कार्यरत दर्द निवारक विशेषज्ञ डॉ. रोहित लाहोरी बताते हैं कि अब हम किसी भी तरह के दर्द को पैमाने पर नापते हैं। मरीज से पूछते हैं उन्हें कितना दर्द है? दर्द का पैमाना एक से दस तक या दस से सौ फीसदी तक हो सकता है। डॉ. लाहोरी बताते हैं कि हम दवा दर्द के इसी पैमाने के आधार पर देते हैं। 

दर्द निवारण की एक और तकनीक है- इंटरवेंशनल तकनीक, जिसका चलन इधर बढ़ा है। इस तकनीक से शरीर के दर्द वाले हिस्से में इंजेक्शन से पीआरपी (प्लेटलेट रिच प्लाजमा) तकनीक से ब्लाक कर दिया जाता है। इसी तरह नसों को भी इस तकनीक से ब्लाक करके सूजन कम की जाती है। पीआरपी तकनीक शरीर के घिसे हुए हिस्सों को दोबारा विकसित करने का काम करती है। देश विदेश में अपनाई जा रही इस तकनीक से डॉ. रोहित लाहोरी जम्मू-कश्मीर के मरीजों को राहत देने का काम कर रहे हैं। 

शरीर में सामान्य तौर पर सिर, कंधे, कोहनी, कूल्हा, घुटना, एड़ी, गर्दन, पीठ, रिस्ट, पीठ का निचला हिस्सा, एंकल का दर्द लोगों को ज्यादा परेशान करता है। अब तक दर्द मिटाने के लिए दर्द निवारक दवाओं पर अधिक जोर दिया जाता रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया में बिना परामर्श और असंतुलित डोज लेने से शरीर को अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचता है। आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा सीधे ही दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर रहा है, जबकि उन्हें अपनी शारीरिक क्षमता का ज्ञान नहीं है। नई इंटरवेंशनल तकनीक से शरीर के उसी हिस्से में दर्द को मिटाने के लिए तय डोज दी जाती है। जिससे अन्य हिस्सों को नुकसान नहीं पहुंचता है। इस नई तकनीक के प्रति लोगों को आराम मिलने के साथ विश्वास बढ़ा है। 
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असंतुलित दर्द निवारक, एंटीबायोटिक दवाइयां बिगाड़ रहीं सेहत

डॉक्टर के बिना परामर्श के दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाइयों का नियमित असंतुलित सेवन करने से किडनी, फेफड़े और मैदा जवाब दे रहे हैं। ताजा मामलों में हाईपरटेंशन, डायबिटीज और दर्द निवारक दवाइयां एक्यूट किडनी फेलियर के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें अधिकांश लोग दर्द के पैमाने से कई अधिक डोज ले रहे हैं, जो उनके शरीर के दूसरे अंगों को खराब कर रही है। नए शोधों में सामने आया है कि समाज का एक बड़ा वर्ग बीमारी और शारीरिक क्षमता के विपरीत ऐसी दवाइयों का सेवन कर रहा है। इन्हें नान स्टेरीडायल एंटी इंफामेट्री ड्रग (एनएसएआईडीएस) कहते हैं। एंटीबायोटिक दवाइयों में एमिनो ग्लाइकोसाइड ग्रुप शारीरिक क्षमता को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होता है। लोग सामान्य दांत, घुटने, कमर और सिरदर्द को मिटाने के लिए नियमित दर्द निवारक दवाइयां ले रहे हैं।  

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