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स्टिकी बम की नई तकनीक सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी, मैगनेट लगाकर भेजी गई थी सांबा में आईबी पर पकड़ी 14 आईईडी

Tue, 02 Mar 2021 09:46 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : ANI
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जम्मू-कश्मीर के सांबा में आईबी पर मिली 14 आईईडी में मैगनेट लगाया गया था ताकि इनको वाहनों के साथ चिपका दिया जाए और जब चाहे टाइमर लगाकर रिमोट से विस्फोट कर दिया जाए। इन्हें स्टिकी बम कहा जाता है और दहशतगर्दों की यह तकनीक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के नए आगाज का संकेत है। जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी है और एक बड़ी चुनौती भी। 14 फरवरी को बीएसएफ ने सांबा में बार्डर पर पाकिस्तान द्वारा ड्रोन के जरिए फेंके गए आईईडी और हथियार बरामद किए थे।

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दरअसल, कश्मीर में आईईडी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट थीं और इसी सतर्कता के चलते यह बम बरामद किए गए थे। सांबा में छह पिस्टल और 14 आईईडी फेंकी गई थी। इन आईईडी में मैगनेट लगा रखा था। ताकि इनको वाहनों पर चिपका दिया जाए और इसको टाइमर के तौर पर इस्तेमाल किया जाए। साथ ही रिमोट से उड़ा दिया जाए। यह आईईडी नई आतंकी तंजीम रजिस्टेंस फोर्स (आरटीएफ) के लिए थी। यह आतंकी संगठन लश्कर ए ताइबा का ही स्थानीय संगठन है।

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अब तक मैगनेट लगी आईईडी (स्टिकी बम) अफगानिस्तान और इराक में इस्तेमाल होती रही है। भारत में इसका इस्तेमाल 2012 में हुआ था। ईरानी आतंकियों ने इसे इजराइल डिप्लोमेट की कार के साथ लगाया था और इसमें उनकी पत्नी घायल हो गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सुरक्षाबलों के काफिले को इस तरह की तकनीक से बचाना होगा। काफिले की सुरक्षा को नए सिरे से पुख्ता करने की आवश्यकता है।
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दो साल पहले आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने कश्मीर में पुलवामा के पास सीआरपीएफ कानवाय को आईईडी से उड़ा दिया था। अब फिर से आईईडी का ऐसा इस्तेमाल घातक साबित हो सकता है। बता दें कि मैगनेट लगाकर आईईडी लगाने का काम द्वितीय युद्ध में ब्रिटिश फोर्स ने इस्तेमाल किया था।

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