अखनूर के पलांवाला सेक्टर में हमले की जिम्मेदारी हिजबुल मुजाहिदीन के लेने से खुफिया एजेंसियां चौंक गई हैं।
हिजबुल की मौजूदगी एजेंसियों की समझ से परे है, क्योंकि इससे पहले कभी जम्मू संभाग की एलओसी और आईबी पर घुसपैठ या फिर आतंकी हमले में हिजबुल की मौजूदगी नहीं रही है। यही कारण है कि हिजबुल का पलांवाला सेक्टर में खुद को शामिल करना एजेंसियों को हज्म नहीं हो रहा। बावजूद इसके एजेंसियों ने इस पर गहरा मंथन शुरू कर दिया है।
सूत्रों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने हिजबुल की मौजूदगी को लेकर काम शुरू कर दिया है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि पलांवाला की घटना को अंजाम देने में शामिल आतंकी हिजबुल के थे या फिर दूसरे आतंकी संगठन के।
पलांवाला हमले को माना जा रहा बैट हमला
एलओसी
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खुफिया सूत्रों का यह भी कहना है कि आतंकी बुरहान के मारे जाने के बाद हिजबुल कमजोर पड़ता जा रहा है। इसलिए अब वो खुद को बड़े आतंकी संगठन के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।
इसलिए एक वजह यह भी हो सकती है कि वह इस हमले में खुद को शामिल होने की बात कह रहा है। दरअसल, पिछले तीन-चार साल से देखा जाए तो जम्मू, सांबा, कठुआ, राजोरी, पुंछ में घुसपैठ और आतंकी हमले लश्कर-ए-तैयबा ने किए हैं।
सूत्रों की मानें तो पलांवाला में सेना के जवानों पर बैट हमला था। आतंकियों ने भारतीय सीमा के भीतर घुसकर स्नाइपर से जवानों को निशाना बनाया। इसमें एक जवान शहीद हो गया और दूसरा घायल हो गया। आतंकी काफी हद तक अंदर आ गए थे, लेकिन जवानों ने उन्हें देख लिया और वापस जाने पर मजबूर कर दिया।