अलग-अलग प्रोत्साहन के लिए मंजूरी मिलेगी
जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग इंसेंटिव के लिए अलग प्राधिकारी को मंजूरी दी गई है। इसमें 5 लाख रुपये तक के प्रोत्साहन की जनरल मैनेजर, 5 से 50 लाख के लिए निदेशालय उद्योग व वाणिज्य की संभाग स्तरीय समिति, 50 लाख से अधिक के लिए उद्योग विभाग की प्रदेश स्तरीय समिति मंजूरी देगी। मंजूर हुई राशि का वितरण 15 दिन के भीतर होगा।
इन क्षेत्रों पर जोर
नई औद्योगिक नीति के तहत उत्पादन, आईटी, कृषि व फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ केयर व फार्मास्यूटिकल, ढांचा व रियल एस्टेट, हर्बल व औषधीय पौधे, दुग्ध, पोल्ट्री व ऊन उत्पादन, शिक्षा व कौशल विकास, पर्यटन व हास्पेटिल्टी, फिल्म पर्यटन, हार्टिकल्चर व पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, हस्तशिल्प व हस्तकरघा, कृषि, सिल्क उत्पादन, एक्सपोर्ट आधारित इकाई, रिन्यूएबल एनर्जी और सरकार की ओर से नामित अन्य क्षेत्र शामिल है।
जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों को 40 साल के लिए जमीन लीज पर दी जाएगी। इसे 99 साल तक बढ़ाया जा सकता है। एक बार जिस जगह पर भूमि आवंटित होगी उसे बदला नहीं जा सकेगा। भूमि आवंटन का फैसला अलग-अलग कमेटियां करेंगी। 50 करोड़ तक के प्रोजेक्ट के लिए जमीन का निर्धारण मंडलीय समिति, 50 से 200 करोड़ के प्रोजेक्ट का उच्च स्तरीय समिति, 200 करोड़ से ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए जमीन आवंटन एपेक्स कमेटी करेगी।
जमीन आवंटन के 60 दिनों के भीतर आवंटी को 100 फीसदी राशि का भुगतान करना होगा। आवंटी तथा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन के बीच आवंटन के 60 दिनों के भीतर लीज डीड होगा। इस अवधि में लीज डीड नहीं हो पाया तो आवंटी को 30 दिन का अंतिम नोटिस दिया जाएगा। किसी भी इंटरप्राइज का प्रारंभिक पंजीकरण तीन साल के लिए मान्य होगा। यदि कोई आवंटी जमीन के आवंटन के दो साल के भीतर इसे सरेंडर करता है तो 20 फीसदी की राशि काटकर शेष 80 फीसदी राशि लौटा दी जाएगी। जमीन आवंटन के लिए प्रोसेसिंग फीस भी निर्धारित की गई है। एक एकड़ के लिए दस हजार, एक से पांच एकड़ के लिए 25 हजार और पांच एकड़ से अधिक के लिए 50 हजार रुपये निर्धारित है।
फायर व आपात सेेवाएं, पुलिस स्टेशन, सरकारी डिस्पेंसरी, पीडीडी, जलशक्ति, बैंक आदि को भी जमीन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन की ओर से निर्धारित कीमत तथा किराये पर आवंटित की जा सकती है। कारपोरेशन इसकी कीमतों में छूट दे सकती है या फिर घटा सकती है। औद्योगिक क्षेत्र में पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, वेयर हाउस आदि के लिए जमीन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये आवंटित होगा। लीज का ट्रांसफर भी सशर्त संभव है।