जेके एजुकेशन चैंबर के चेयरमैन ने कहा कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन में विशेषज्ञों को पूरी तरह नदारद रखकर सिर्फ लोगों की सहानुभूति लेने के लिए इस तरह का आदेश जारी किया गया। इसका असर प्रदेश के 25 लाख बच्चों पर पड़ रहा है।
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से वर्चुअल क्लासेस के लिए तय की नई गाइडलाइन निजी स्कूल संचालकों को मंजूर नहीं है। निजी स्कूल संचालकों का कहना कि इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा, बल्कि सिलेबस को पूरा करना स्कूलों के लिए चुनौती होगी। सरकार ने सिलेबस कम करने की बजाय स्क्रीन टाइम को कम किया। इससे लगता है कि गाइडलाइन को सिर्फ और सिर्फ जनता की सहानुभूति और राजनीतिक उद्देश्य से जारी किया है।
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जेके एजुकेशन चैंबर के चेयरमैन जीएन वार ने कहा कि वुर्चअल क्लासेस की नई गाइडलाइन छात्रों और विशेषज्ञों को नजरअंदाज कर तय की है। अगर सरकार की गाइडलाइन इतनी ही प्रभावी है तो क्यों न इसे पूरे देश में लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि नई गाइडलाइन पर ही जेके एजुकेशन चैम्बर ने दो वर्कशॉप का आयोजन किया। एक वर्कशॉप में प्रदेश के विशेषज्ञ होंगे, जबकि दूसरी में देश और विदेश के शिक्षा और बच्चों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। इन वर्कशॉप में विशेषज्ञों और लोगों की राय लेकर सरकार के समक्ष अपनी सिफारिश रखेंगे। इसमें नए आदेश से होने वाले प्रभावों को उजागर किया जाएगा।
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निजी स्कूलों की ओर से अब तक किसी तरह की अपत्ति नहीं आई है। अगर ऐसा कुछ आएगा तो उस पर गौर किया जाएगा। -निसार अहम वानी, अतिरिक्त आयुक्त, स्कूल शिक्षा विभाग