प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद रियासत में नई सरकार इसी महीने संभव है। पीडीपी की 24 मार्च को प्रस्तावित बैठक में सरकार गठन की तिथि का एलान हो सकता है। भाजपा सहित अन्य दलों की निगाहें बैठक पर टिकी हुई हैं। बैठक में पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों तथा एमएलसी को बुलाया गया है।
पीडीपी सूत्रों का कहना है कि बैठक में विधायक दल के नेता का चुनाव होगा। इसके बाद राजभवन जाकर सरकार गठन का औपचारिक दावा पेश किया जाएगा। सियासी गलियारे में चर्चा है कि पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए पीडीपी प्रमुख को नए सिरे से बातचीत करने के लिए आगे कदम बढ़ाना पड़ा।
भाजपा के कड़े रुख के बाद यह असंतोष और गहरा गया था। ऐसे में पार्टी में असंतोष को दबाने और उत्तराखंड जैसे हालात से बचने के लिए गठबंधन को दोबारा से पटरी पर लाने की दिशा में महबूबा ने प्रयास शुरू किए।
पीडीपी-भाजपा खेमे में उत्साह
महबूबा मुफ्ती और अमित शाह
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रियासत का बजट भी अभी पास नहीं हो सका है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार 31 मार्च से पहले अस्तित्व में आ जाएगी। पूर्व डिप्टी सीएम डा. निर्मल सिंह का कहना है कि पार्टी को पीडीपी के कदम का शुरू से ही इंतजार है। फैसला उन्हें लेना है। उम्मीद है कि जल्द ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी और रियासत में विकास कार्यों को फिर से गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद महबूबा के संकेतों से पीडीपी और भाजपा खेमे में उत्साह है। दोनों दलों के विधायकों का कहना है कि लोकप्रिय सरकार होने से कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहता है। आरएस पुरा के विधायक डा. गगन भगत कहते हैं कि सरकार रहने से हर काम में आसानी रहती है।
लगता है कि अपनी बात रख पाने का मंच उनके पास है। उधर, नेकां, कांग्रेस और पैंथर्स पार्टी का कहना है कि ढाई महीने से भी अधिक समय तक रियासत को राजनीतिक अस्थिरता के दौर में रखने का कोई औचित्य नहीं था।