दो दिन पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) को ‘अप्रिय कानून’ की संज्ञा दी थी, वहीं रियासत के कांग्रेस अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज ने रविवार को इसे हटाने की वकालत की।
प्रो. सोज ने इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि रैलियों में अफस्पा पर सिर्फ भाषण देने की बजाय इस कानून को हटाने के लिए सैन्य जनरल से बात करते तो ज्यादा अच्छा होता। मुख्यमंत्री खुद यूनिफाइड कमान के चीफ हैं। उन्हें पता है कि कैबिनेट में इस मुद्दे को पारित कर केंद्र सरकार को भेजना होगा।
ढाई साल पहले उन्होंने तत्कालीन जनरल से बातचीत करने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय और वर्तमान के हालात में काफी सुधार हो चुका है।
इसलिए यह सही समय है कि अफस्पा हटाया जाए। कश्मीर में शांति का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि एक दिन पहले वहां आयोजित रोड शो के दौरान महिलाएं सड़कों पर गीत गातीं और डांस करतीं नजर आईं। प्रो. सोज जम्मू दौरे के दौरान प्रेस से बातचीत कर रहे थे।
भाजपा की बोली बोल रहे हैं उमर
भाजपा द्वारा अनुच्छेद 370 पर बहस करने की बात कहे जाने पर सोज ने कहा कि भाजपा तीन काम कभी नहीं कर सकती। पहला बिना मुस्लिम भाइयों के समर्थन या अदालत के आदेश से राम मंदिर निर्माण, दूसरा समान नागरिक संहिता और तीसरा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना।
भाजपा की बोली बोलने वाले कश्मीरी नेताओं को आडे़ हाथों लेते हुए सोज ने कहा कि वह न सिर्फ अपने हाथ गर्म कर रहे हैं, बल्कि अपनी जेब भी गर्म करने की फिराक में हैं, लेकिन कश्मीर की जानता बेवकूफ नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण पूछे जाने पर सोज ने इसका ठीकरा भी मीडिया पर मढ़ दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने बड़े योजनाबद्ध तरीके से मीडिया का उपयोग किया। अखबारों को पूरे पेज के विज्ञापन दिए। कांग्रेस द्वारा भी इस तरह के विज्ञापन दिए जाने के संबंध में पूछे सवाल पर सोज ने कहा कि इतने रुपये कांग्रेस ने कभी खर्च नहीं किए।
भाजपा के मिशन 44 प्लस को प्रो. सोज ने एक ऐसा सपना बताया, जो कभी पूरा नहीं हो सकता। आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाली सीटों के आंकलन पर सोज टालमटोल कर गए। प्रो. सोज ने कहा कि अभी इस पर कोई विचार नहीं हुआ है।
सरकार बनाने के लिए अन्य दलों के समर्थन की जरूरत पड़ने पर किस पार्टी से हाथ मिलाएंगे? इस पर सोज ने कहा कि इस संबंध में कोई भी फैसला 23 दिसंबर के बाद ही होगा।