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विशेष दर्जे के लिए आर-पार की लड़ाई में उतरेगी नेकां: उमर

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि संविधान के तहत राज्य को दिए गए विशेष दर्जे पर किसी भी हमले का नेशनल कॉन्फ्रेंस 'पूरी ताकत' से जवाब देगी।
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उमर ने सोशल साइट ट्विटर पर लिखा है कि, 'मुझे साफ तौर पर कहने दीजिए। जेकेएनसी इस तरह के किसी भी कदम पर पूरी ताकत से लडेगी चाहे कुछ भी हो।'

पूर्व मुख्यमंत्री उन खबरों पर प्रतिक्रिया जता रहे थे जिसमें कहा गया था कि आरएसएस का दिल्ली स्थित करीबी थिंक टैंक जम्मू ऐंड कश्मीर स्टडी सेंटर (जेकेएससी) अनुच्छेद 35 ए को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रहा है। संगठन का दावा है कि राज्य के अस्थायी नागरिकों के विशेषाधिकार और अधिकार को यह खारिज करता है।
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क्या है पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार की रणनीति

नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार की रणनीति के बारे में बताने को कहा है। उन्होंने कहा, 'सच में मैं सुनना चाहता हूं कि क्या राज्य में भाजपा-पीडीपी सरकार इस हमले का व‌िरोध करेगी।'

सरकार के प्रवक्ता और जम्मू कश्मीर के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर और भारत सरकार के बीच मौजूदा संवैधानिक संबंधों को पहले भी चुनौती दी जा चुकी है लेकिन मूल स्वभाव में यह बरकरार है।'इस पूरे मामले पर राज्य सरकार ने कहा है कि वह समय आने पर चुनौतियों से निपटेगी।
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क्या है 35 ए

35 ए के तहत वेस्ट पाकिस्तान के रिफ्यूजियों को नागरिकता नहीं मिली है। यह सभी भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 35 ए के नाम पर होता रहा है।

35 ए  तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के एक आदेश से संविधान में शामिल हुआ। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला की सलाह पर राष्ट्रपति के आदेश के जरिए इन प्रावधानों को संविधान में शामिल कराया।

संविधान में अनुच्छेद 35 ए अपेंडिक्स में मिलता है। इसकी आड़ में महिलाओं के अधिकार छीने गए हैं और अन्य वर्गों से भी भेदभाव हुआ है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बहन सारा के बच्चों को भी जम्मू कश्मीर में उसकी मां की संपत्ति पर अधिकार नहीं है। इस अधिकार के लिए सुनंदा पुष्कर भी संघर्ष करती रहीं।
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