नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा विशेष दर्जे की कीमत पर नहीं मिलेगा। आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे पर पार्टी ने उन्हें 'मानसिक दिवालियापन' का शिकार बताया, जिससे दोनों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।
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सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मंगलवार को कहा कि जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने पर उसका जोर विशेष दर्जे की बहाली की मांग की कीमत पर कभी नहीं होगा। यह बयान श्रीनगर के सांसद आगा रुहुल्लाह द्वारा बडगाम जिले की एक रैली में पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा के बाद आया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह के इस कदम को उनके "मानसिक और नैतिक दिवालियापन" का उदाहरण बताया।
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पार्टी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया कि विशेष दर्जे की सुरक्षा और सांविधानिक अधिकारों का संरक्षण उसकी राजनीतिक विचारधारा की नींव है। इसे छोड़ना पार्टी के 90 से अधिक वर्षों के सिद्धांतों को छोड़ना होगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह के भाषण को नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक और असंसदीय बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि रुहुल्लाह ने विशेष दर्जे के मुद्दे पर इस्तीफा दिया, लेकिन यह पार्टी अध्यक्ष के कहने पर हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने याद दिलाया कि रुहुल्लाह 2010 में मंत्री थे और 2014 में एनसी टिकट पर चुनाव लड़े थे, तब उन्होंने 2010 की घटनाओं को नहीं उठाया।
रुहुल्लाह के संसदीय प्रयासों पर सवाल
पार्टी ने रुहुल्लाह से सवाल किया कि उन्होंने जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए संसद में क्या किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पूछा कि क्या उन्हें लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए संसद में नहीं चुना गया था। पार्टी ने बताया कि रुहुल्लाह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेकर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के लिए 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पूछा कि क्या उन्होंने कभी विशेष दर्जे या राज्य के दर्जे की बहाली के लिए ऐसा प्रयास किया।
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विशेष दर्जे की बहाली की प्रतिबद्धता
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि राज्य का दर्जा बहाली विशेष दर्जे की कीमत पर नहीं होगी। पार्टी ने कहा कि अगर ऐसा होता तो सरकार का पहला काम विशेष दर्जे पर केंद्रित नहीं होता। मुख्यमंत्री के 15 अगस्त के भाषण में भी इसकी पुष्टि की गई थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी पहचान और सांविधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।