संसाधन ही तय करते हैं राजनीतिक ताकत
राजनीतिक विश्लेषक मनु श्रीवत्स के अनुसार पीडीपी को संसाधनों के मामले में शुरू से ही चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस की स्थापना आजादी से पहले हुई थी और दशकों में मजबूत संगठनात्मक ढांचा तथा स्थायी संपत्तियां खड़ी की हैं। ऐसे में पीडीपी को जनाधार बढ़ाने और संगठन विस्तार के साथ-साथ संसाधन जुटाने पर ध्यान देना होगा।
एनसी की संपत्ति पीडीपी से 197 गुना ज्यादा
वर्ष 2023-24 में एनसी की कुल आय 2.77 करोड़ रुपये रही। इसमें 1.04 करोड़ चंदे से और 16.82 लाख रुपये किराये से प्राप्त हुए। इस दौरान एनसी को सिर्फ ब्याज से 1.56 करोड़ रुपये की आय हुई। यह राशि पीडीपी की पूरे वर्ष की कुल आय से करीब 15 गुना अधिक है। एनसी का कोष (कॉर्पस फंड) 35.68 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पार्टी के पास 19.61 करोड़ रुपये नकद और बैंक जमा के रूप में मौजूद हैं। कुल संपत्तियों का आकार 37 करोड़ रुपये से अधिक है। 2023-24 में एनसी ने 2.72 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्मचारियों, चुनावी गतिविधियों और प्रचार व जनसंपर्क गतिविधियों पर खर्च किए गए। एनसी का यह ब्यौरा वर्ष 2023-24 का है। पार्टी ने सत्ता में आने के बाद का वित्तीय ब्यौरा चुनाव आयोग में जमा नहीं किया है।
भाजपा को 4.13 करोड़, कांग्रेस को 9.5 लाख रुपये का चंदा
वित्त वर्ष 2024-25 में जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को कुल 4.22 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा भाजपा के खाते में गया। भाजपा को प्रदेश से 4.13 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ, जबकि कांग्रेस को 9.5 लाख रुपये मिले। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश से मिले कुल चंदे में लगभग 80 फीसदी राशि व्यक्तिगत दानदाताओं से आई। एडीआर के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश से 3.37 करोड़ रुपये व्यक्तिगत दानदाताओं ने दिए, जबकि कॉरपोरेट और कारोबारी घरानों का योगदान 84 लाख रुपये रहा।