जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि भूमि को गैर कृषि कार्यों में इस्तेमाल करने को मंजूरी दे दी है। इसके बाद सियातस गरमा गई है। पूर्व सीएम महबूबा ने कहा कि नए नियम जनसांख्यिकीय परिवर्तन के डिजाइन का खुलासा करते हैं। उमर बोले, 15 साल के अधिवास प्रमाणपत्र की जरूरत न होना आशंकाओं को दे रहा जन्म।
जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से भूमि उपयोग कानूनों में बदलाव की नेकां व पीडीपी ने आलोचना की है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती ने कहा कि नए नियमों से प्रदेश के लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ज्ञात हो कि सरकार ने कृषि भूमि को गैर कृषि कार्यों में इस्तेमाल करने को मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि कृषि भूमि को गैर कृषि उद्देश्यों में बदलने में सक्षम नए कानून जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के डिजाइन का खुलासा करते हैं। ट्वीट किया कि विकास का एजेंडा एक बहाना है। नवीनतम नियम में 15 साल के डोमिसाइल सर्टिफिकेट की भी जरूरत नहीं है।
स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरियों में उनके सही हिस्से से वंचित करने के बाद, अचानक ऐसे नीतिगत फैसले जो बाहरी लोगों के लिए जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने का मार्ग प्रशस्त करते हैं, केवल स्थानीय लोगों को और कमजोर करने के लिए हैं।
विज्ञापन
नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भूमि उपयोग नियमों में बदलाव पूर्ववर्ती राज्य में किए गए बड़े सुधारों को पूर्ववत कर देगा। गैर कृ षि उद्देश्यों के लिए कृषि भूमि के उपयोग की अनुमति देना किसान भूमि सुधार के ताबूत में एक और कील है।
उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक सुधार गरीबी के निम्न स्तर का एक प्रमुख कारण रहा है और इससे जम्मू कश्मीर के लोगों की खाद्य सुरक्षा को भी खतरा होगा। तथ्य यह है कि भूमि उपयोग के इस रूपांतरण के लिए 15 साल के अधिवास प्रमाण पत्र की भी आवश्यकता नहीं है। यह इस तरह के निर्णयों के पीछे के उद्देश्यों के बारे में आशंकाओं को फि र से जगाएगा।
खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए घातक: माकपा
माकपा नेता एम वाई तारिगामी ने भी भूमि उपयोग कानूनों में किए गए बदलावों की आलोचना की। कहा कि कृषि भूमि को गैर कृषि उद्देश्यों के लिए परिवर्तित करना कारपोरेट और रियल एस्टेट के हितों की सेवा करने की साजिश है। यह हमारी खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा।