बावे वाली मंदिर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित महामाया माता मंदिर में भी भक्तों की आस्था का केंद्र रहता है। इनमें अधिकांश भक्त बावे वाले मंदिर में दर्शन के बाद यहां पहुंचते हैं। यहां से पुराने शहर का नजारा देखते ही बनता है। तवी के किनारे ऊंची पहाड़ी पर स्थित माता के दरबार में हजारों भक्त पहुंचते हैं।
कोल कंडोली में माता वैष्णो देवी के पहले दर्शन होंगे
शहर से करीब दस किलोमीटर दूरी पर नगरोटा स्थित कोल कंडोली मंदिर में भी नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्री माता वैष्णो देवी के यहां पहले दर्शन होते हैं। मंदिर में स्थापित पंगूड़े आकर्षण का केंद्र रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता इन झूलों में झूले झूलती थीं।
चिंतपूर्णी मंदिर में तांता लगेगा
पुराने शहर के साथ लगते सर्कुलर रोड पर स्थित चिंतपूर्णी मंदिर में नवरात्र के दौरान आस्था का सैलाब पहुंचता है। इस मंदिर में मान्यता है कि दरबार में मन्नत लेकर पहुंचने वाले भक्तों की चिंताओं को मां अपने ऊपर ले लेती हैं। यहां कई त्वचा संबंधी रोगों से भी निजात मिलती है।