राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने नार्को टेरर मामले में गुरुवार को जम्मू के और पंजाब के तरनतारन स्थित छह ठिकानों पर छापे मारे। टीम ने इस दौरान कुछ लोगों से पूछताछ कर कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों से आगे जांच में मदद मिलेगी। यह कार्रवाई पिछले वर्ष 20 सिंतबर को जम्मू जिले के अरनिया में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हथियारों के साथ 62 किलो हेरोइन और हथियार पकड़े जाने के मामले से जुड़ी है। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ये कार्रवाई आरोपियों के जम्मू जिले में पांच और तरनतारन के एक ठिकाने पर की गई।
पांच से छह सदस्यों की एक एनआईए टीम वीरवार को अरनिया के सेइ कलां व सेइ फोगला गांव पहुंची। नारको टेररिज्म मामले में पकड़े गए तीन लोगों सुभाष चंद्र और शाम लाल के साथ कुछ अन्य स्थानीयों से भी पूछताछ की। हालांकि पूछताछ का ब्यौरा सामने नहीं आया है। 20 सितंबर 2020 को अरनिया व बुल्लेचक के मध्य अग्रिम पोस्टों पर नशीले पदार्थ और हथियारों की तस्करी की बड़ी कोशिश को बीएसएफ ने नाकाम कर दिया था।
इस दौरान हथियारों के साथ 62 किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी। इसके अलावा चीन निर्मित दो पिस्तौल, तीन मैगजीन और सौ राउंड भी बरामद हुए थे। पाकिस्तान ने नशे की तस्करी कराने के लिए कवर फायर भी किया था। हालांकि बीएसएफ ने इसे विफल कर दिया था। इस मामले में राष्ट्रविरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए साजिश रचने के आरोप में जम्मू और पंजाब के तरनतारन से छह व्यक्तियों जसराज सिंह, शाम लाल, बिशन दास, अजित कुमार, गुरबख्श सिंह और गुरप्रताप सिंह को गिरफ्तार किया गया था।
बब्बर खालसा को आर्थिक मदद पहुंचाता था गुरप्रताप
इस मामले में एनआईए ने 26 नवंबर 2020 को मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी थी। एनआईए ने शुरुआती जांच में पाया कि इस नार्को टेरर मॉड्यूल का मुखिया तरनतारन (पंजाब) का रहने वाला गुरप्रताप सिंह है जो नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी से प्राप्त पैसे से आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशल को मदद पहुंचा रहा था। जम्मू के अरनिया में मिली हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 300 करोड़ अरनिया में मिली 62 किलोग्राम हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 300 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
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