संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। शहर के अभिनव थिएटर में रविवार को पनुन कश्मीर राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में जम्मू-कश्मीर सहित अन्य राज्यों से आए घाटी से विस्थापित पंडितों ने फिर से मातृभूमि वापस लेने के लिए हुकांर भरी। उनका कहना है कि पिछले 35 साल से हम निष्कासन का जीवन जी रहे हैं। कश्मीरी पंडितों ने घाटी को सुरक्षित किया और अब जम्मू को कर रहें हैं। तमिलनाडु से आए कश्मीरी पंडित पुन्नू स्वामी ने कहा कि अब कश्मीर का हिंदू जाग चुका है।
घाटी से विस्थापित होने से देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में कश्मीरी पंडितों को शरण लेनी पड़ी। ऐसे में अगर अब भारत सरकार हम सभी लोगों के प्रति कुछ नहीं करेगी तो 19 जुलाई से कश्मीरी पंडित समुदाय दुनिया के हर कोने में निष्कासन का विरोध जताते हुए अपना संघर्ष शुरू करेंगे।
-सोहन लाल, कश्मीरी पंडित, नगरोटा
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हम उस घटना के बारे में सोचकर सिहर उठते हैं जिसका पिछले 35 सालों से हमारा समुदाय राजनीतिक दलों का शिकार होता रहा है। अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए कश्मीरी पंडित ही नहीं, बल्कि कश्मीरी हिंदू भी व्यापक कदम उठाने को तैयार हैं।
-पंडित राजेश केसरी, कच्ची छावनी, जम्मू
कश्मीर हमारा है, हम उसको किसी भी कीमत पर लेकर रहेंगे। करणी सेना देश के दुश्मनों को मिट्टी में मिलाने का काम जारी रखेगी। हम सभी को अपना संघर्ष जारी रखना होगा।
-शेखावत, अध्यक्ष, करणी सेना के राष्ट्रीय