प्रथम चरण में 15 सीटों पर मतदान के बाद कश्मीर की स्वायत्ता का मुद्दा फिर से गरम हो रहा है। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी दोनों कश्मीरी दल इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। कश्मीर में पैठ बनाने की कोशिश में जुटी भाजपा ने अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दे को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है, लेकिन कश्मीरी पार्टियां इस मुद्दे पर अब भी मुखर हैं।
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद विकास तमाम मुद्दों में सबसे ऊपर था। भाजपा और कांग्रेस के एजेंडे में रोजगार और विकास को सबसे अधिक अहमियत दी गई, लेकिन भाजपा का रथ रोकने के लिए कश्मीरी दल फिर से उन मुद्दों को हथियार बना रहे हैं, जो अलगाववादी मानसिकता को सहलाती हैं।
इस चुनाव में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को चौतरफा कड़ी चुनौती मिल रही है। उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला इलाज के सिलसिले में लंदन में हैं। इस कारण पुराने दिग्गजों में से कुछ ने बगावत का झंडा उठा लिया और कुछ ने दूसरे दलों का दामन थाम लिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर में भ्रष्टाचार के लिए उमर सरकार को सीधा जिम्मेदार ठहराकर कठघरे में खड़ा किया। भाजपा और पीडीपी की चुनौती के अलावा उमर को उस कांग्रेस के भी हमले झेलने पड़ रहे हैं जो पूरे छह साल तक उनकी गठबंधन सरकार की हिस्सेदार रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बाद में उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार की विफलता का ठीकरा उमर के माथे ही फोड़ा है। उमर अपनी पार्टी में एकमात्र वोट खींचने की क्षमता वाले नेता हैं। चौतरफा हमले के बाद उमर ने तेवर सख्त किए और अब वह लगभग हर सभा में कश्मीर की स्वायत्तता का मुद्दा उठाने लगे हैं।