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जम्मू-कश्मीर: उमर ने दोहराया पिता का इतिहास

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जम्मू-कश्मीर के कार्यवाहक मुख्यमंत्री का पद छोड़कर उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला का 12 साल पुराना इतिहास दोहरा दिया है।
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अक्तूबर 2002 में फारूक ने भी तत्कालीन राज्यपाल जीसी सक्सेना को कार्यवाहक मुख्यमंत्री का पद छोड़ने का फैसला सुनाया था। फारूख के इस फैसले के चलते उस समय भी 15 दिन के लिए राज्यपाल शासन लागू किया गया था।

फारूक की दलील थी कि पीडीपी और कांग्रेस सरकार गठन का तालमेल बिठाने में काफी वक्त लगा रहे हैं। लिहाजा उन्हें पद से मुक्त किया जाए।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की गुजारिश के बावजूद फारूक ने अपना फैसला नहीं बदला था।

'दोनों दलों ने लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई'

नेकां के महासचिव डा. शेख मुस्तफा कमाल ने कहा कि भाजपा और पीडीपी सत्ता की भूख रखती हैं। दोनों दल अफस्पा और अनुच्छेद 370 पर अपनी स्थिति साफ नहीं कर पाए हैं। जनता के हितों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए राजनीति की जा रही है।

दोनों दलों ने लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। सरकार न बनने से राज्य के बाढ़ पीड़ितों को सबसे ज्यादा प्रभावित होना पड़ रहा है। कमाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी और कै बिनेट पोर्टफोलियो के  लिए भाजपा और पीडीपी की लड़ाई जगजाहिर हो गई है। दोनों ही दल अपने मुख्य मुद्दों को भूल चुके हैं।

उन्होंने मुख्य सचिव, मंडलायुक्त कश्मीर और संबंधित डीडीसी को बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और राहत कार्यों को प्राथमिकता पर करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए केंद्र से 44000 करोड़ रुपये का पैकेज न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उमर ने पीडीपी को जिम्मेदार ठहराया

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रियासत में राज्यपाल शासन के लिए पीडीडी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पार्टी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद पर आरोप लगाया कि छह साल तक मुख्यमंत्री रहने की उनकी जिद ने सरकार निर्माण पर रोक लगाई।

उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, ‘पिछले एक माह से राज्य में पूर्ण प्रशासन नहीं है और लोग इस बात का इंतजार नहीं कर सकते कि मुफ्ती छह साल के मुख्यमंत्री पद के लिए बातचीत कर सकें।’ उमर ने आगे लिखा, ‘बाढ़ के बाद बहाली और पुनर्वास प्रभावित हो रहा है। जवाबदेह प्रशासन अनुपस्थित है।

सीमा पर मानवीय समस्याएं खड़ी हैं।’ उन्होंने लिखा, ‘पीडीपी संभ्रम की स्थिति बनाए रखना चाहती थी, ताकि मुफ्ती को भाजपा छह साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने को राजी हो। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता।’ उमर ने अपने ट्विट में रियासत के लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि मतदान में इतना बड़ा जनादेश मिलने के बावजूद राज्यपाल शासन की परिस्थितियां बनीं।

उमर ने आगे लिखा, ‘यदि पीडीपी 19 जनवरी से पहले सरकार बना लेती तो मैं सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता कि वह सही थे और मैं गलत। चलो आगे देखते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर कहा कि मैं लुत्फ उठाने के लिए वापस श्रीनगर जा रहा हूं और अगले चंद दिनों में अपने विधानसभा क्षेत्र में जाने की योजना बनाऊंगा।

जारी रहेगा सबका साथ सबका विकास: जुगल

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद जुगल किशोर शर्मा ने शुक्रवार को रायपुर दोमाना विधानसभा क्षेत्र के पटोली, बन तालाब और चिन्नोर में विधायक बाली भगत के साथ बैठकों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सबका साथ सबका विकास के मंत्र को जारी रखेगी।

जुगल ने कहा कि भाजपा रियासत के सभी क्षेत्रों के साथ सामान व्यवहार करना चाहती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा वोट फीसदी मिला है। उन्होंने पिछले सात महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किये गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पूरे देश में विकास का नया दौर शुरू हुआ है।

उन्होंने अखनूर-राजोरी-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते यातायात को देखते हुए तेजी से इस पर कार्य करवाने का आश्वासन भी दिया। वहीं नवनिर्वाचित विधायक बाली भगत ने मतदाताओं का आभार प्रकट कराते हुए कहा कि उन्हें विजयी बनाकर लोगों ने जो विश्वास जताया है, उस पर वह खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।

इस अवसर पर जिला प्रधान सुखदेव सिंह, जिला उप प्रधान मधु सूदन, महासचिव ओमी खजूरिया, मंडल प्रधान हंस राज मन्हास, नरेंद्र सिंह मन्हास भी मौजूद रहे।
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कांग्रेस का शिष्टमंडल मिला सोनिया से

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के शिष्टमंडल ने शुक्रवार को वरिष्ठ नेता एवं इंद्रवाल से विधायक गुलाम मोहम्मद सरूरी की अगुवाई में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से नई दिल्ली में मुलाकात की। नेताओं ने उन्हें जम्मू-कश्मीर के मौजूदा सियासी परिदृश्य के अलावा धर्मनिरपेक्ष सियासी दलों से गठजोड़ जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

सोनिया ने प्रदेश कांग्रेस नेताओं से कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर के लोगों की सेवा में अपना कार्य करती रहेगी और रियासत में विकास, शांति और खुशहाली में अपनी तरह से पूरा योगदान देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विघटनकारी ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी जोकि धर्म और क्षेत्रवाद के नाम पर राजनीति कर रहे है।

उन्होंने पार्टी नेताओं को सलाह दी कि वह लोगों के साथ संपर्क बनाए रखे और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व रियासत के लोगों के कल्याण की दिशा में कार्य करता रहेगा। शिष्टमंडल में सोपोर के विधायक हाजी अब्दुल रशीद डार और प्रदेश कांग्रेस के सचिव एवं प्रवक्ता सलमान निजामी भी शामिल थे।

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस शिष्टमंडल ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और अखिल भारतीय कांग्रेस की महासचिव एवं जम्मू-कश्मीर प्रभारी अंबिका सोनी से भी मुलाकात की। आजाद और सोनी ने शिष्टमंडल को जरूरी दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि वह राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के बीच करीबी समन्वय बनाए रखें ताकि विघटनकारी ताकतों को दूर रखा जा सके।
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