उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी से अपील की है कि वह पार्टी को सलाह दें कि बाधाओं को दूर कर चुनाव में किस तरह से हिस्सा ले सकती है। अगर चुनाव में भाजपा को छोड़ अन्य किसी भी दल को भागदारी से रोकने का लक्ष्य है तो इस पर और कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर भी अगर लक्ष्य जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने का है तो बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए।
2018 में हुए पंचायत चुनाव का नेकां के साथ ही पीडीपी ने बहिष्कार किया था। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित क्षेत्र बनने के बाद पहली बार यहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पंचायत उपचुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव 2018 के चुनाव के उलट पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़े जा रहे हैं।