नई परिस्थितियों में अलगाववादी संगठन कश्मीर घाटी में भी अपनी गतिविधियां सीमित कर चुके हैं। वहीं मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी भी 2018 की तरह चुनाव बहिष्कार की घोषणा की स्थिति में नहीं हैं।
यही नहीं, पीडीपी का एक बड़ा गुट पार्टी से बगावत कर तीसरे मोर्चा के रूप में उभर रहा हैं। इस धड़े के चुनाव में भाग लेने की संभावना तो हैं ही, दलीय आधार पर चुनाव होने से नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी भी चुनाव लड़ने पर विचार कर रही हैं।
इन पार्टियों को भी लग रहा हैं कि चुनाव बहिष्कार कर जमीनी स्तर से लेकर प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि और खराब होगी। उल्लेखनीय हैं कि 2018 के पंचायत चुनाव में 33,592 पंचों और 4,290 सरपंचों की सीटों में से चुनाव बहिष्कार के चलते 22,214 पंचों और 3,459 सरपंचों की सीटों पर ही चुनाव हो पाया था।
11,639 पंचों और 1,011 सरपंचों की रिक्त सीटों पर होना हैं चुनाव
पंचायत उपचुनाव में कुल 11,639 पंचों और 1,011 पंचों की रिक्त सीटों पर चुनाव होना हैं। इनमें से कश्मीर संभाग में 11,457 पंचों व 887 सरपंचों की सीटें शामिल हैं। जम्मू संभाग में केवल 182 पंचों और 124 सरपंचों की ही रिक्त सीटें हैं।