विपक्ष ने बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की स्पीच का बायकॉट किया। महबूबा को राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देना था। विपक्ष ने सरकार पर मासूम नागरिकों की मौतें रोकने में विफल रहने का आरोप जड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष उमर अब्दुल्ला बोले, हमने बीते दिन दक्षिण कमीर के एक घर में हुई नागरिक की मौत का मामला उठाया था। सीएम साहिबा को आज हाउस में आकर इस मसले पर बयान देना चाहिए था, लेकिन वह राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देने दोपहर बाद आएंगी।
उन्होंने कहा, कहीं कोई भी हादसा होता है, तो सीएम साहिबा का दुख केवल अखबारों के बयानों में दिखता है। उन्होंने मासूम नागरिकों के मारे जाने को लेकर राजस्व मंत्री अब्दुल रहमान वीरी की तरफ से आए बयान पर भी नाइत्तेफाकी जताई। कहा, मैं वीरी की बात से मुतमइन नहीं।
मुख्यमंत्री जो गृह मंत्री भी हैं, अच्छा होता वह हाउस में मौजूद रहतीं। अगर अफसोस के चंद अल्फाज सीएम महबूबा मुफ्ती से सुनने को मिलते तो बेहतर होता। तकरीर से पहले एक मिनट भी अगर सीएम साहिबा यह अल्फाज बोलतीं तो मैं चुपचाप सुनता, मेज थपथपाता।
लेकिन अब वह उम्मीद न रखें कि हम उनकी स्पीच सुनेंगे। हम स्पीच सुनने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा कि वह सीएम की स्पीच के दौरान हाउस में भी मौजूद नहीं होंगे। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उमर ने एक बार फिर रियासत में बदतर होते सुरक्षा हालातों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
कहा कि वह हर मौके पर नाकाम रही है। हम जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालातों पर अलग से चर्चा चाहते थे। कांग्रेेस-एनसी सदस्य चर्चा के लिए प्रस्ताव भी लाए, लेकिन उसे नामंजूर कर दिया गया।