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Jammu News: नशे की लत में गटकी जा रहीं नारकोटिक दवाएं

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। नशे की लत में नारकोटिक दवाओं (नशीली दवाओं) का दुरुपयोग बढ़ रहा है। ये दवाएं हेरोइन व अन्य महंगे नशीले पदार्थों का विकल्प बनती जा रही हैं। इनमें अधिकांश दवाएं शेड्यूल एक्स श्रेणी में होती हैं, जिन्हें डाक्टर की पर्ची पर ही दिया जा सकता है, लेकिन नशे को पाने के लिए लोग विभिन्न तरीके अपनाकर अवैध ढंग से बाजार से ऐसी दवाओं को ले रहे हैं।
मनोरोग अस्पताल जम्मू की औसतन मासिक 8500 की ओपीडी में करीब 2000 यानी 24 प्रतिशत ऐसे ही मामले मिल रहे हैं। इनमें अधिकांश के इतिहास में दर्द निवारक व नींद आदि की दवाओं का सेवन किया जा रहा है।
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राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर के मनोरोग विभाग की ओर से करवाए गए एक सर्वे में पाया गया कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में नशीली दवाओं का दुरुपयोग करने वाले प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर दूसरे नंबर पर है। अनुमानित 13.50 लाख लोग नशीली दवाओं का सेवन कर रहे हैं, जो प्रदेश की 10.8 प्रतिशत आबादी है। इसमें अधिकांश मामले 19 से 40 साल के बीच के हैं।
इस नशे के खेल में बड़ी संख्या में योग्य मरीज परेशान हो रहे हैं, जबकि नशे के लिए कई दूसरे लोग बाजार से ऐसी दवाएं पा रहे हैं। मनोरोग अस्पताल जम्मू में कार्यरत मनोचिकित्सक डा. राकेश बनाल ने बताया कि नशे को पूरा करने के लिए नारकोटिक दवाओं का तेजी से चलन बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है।

डाक्टर की पर्ची पर ही दी जाती है दवा
शहर में दवाओं की 600 दुकानें हैं। नारकोटिक में अधिकांश दवाएं एक्स श्रेणी में आती हैं। इन्हें दुकानदार द्वारा डाक्टर की पर्ची पर डोज के मुताबिक ही मरीज को दिया जाता है। इसमें पर्ची का सारा रिकार्ड रखा जाता है। इसका बाद में सत्यापन होता है। अगर कुछ गैर दुकानदार लोग नारकोटिक दवाओं का अवैध धंधा कर रहे हैं, तो सरकार को उन पर नकेल कसनी चाहिए।
-गुरमीत सिंह, अध्यक्ष, जम्मू कश्मीर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (जम्मू संभाग)
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नशे के लिए डाक्टर की स्टंप तक चोरी कर ली
मनोरोज अस्पताल में गत माह एक ऐसा मामला पकड़ा गया था, जिसमें नशे की लत को पूरा करने के लिए एक व्यक्ति ने अस्पताल में कार्यरत एक मनोचिकित्सक के स्टांप की चोरी कर दी। जब वह किसी लेटरपेड पर स्टाम्प लगाकर दवा लेने दुकानद पर पहुंचा तो यह मामला रजिस्ट्रार के पास पहुंचा तो उन्होंने संबंधित मनोचिकित्सक के हस्ताक्षर न पाकर किसी अंजान के देखे। इसके बाद उस व्यक्ति से पूछताछ की गई। बाजार में भी ऐसे कई मामले पकड़े जाते हैं जिसमें नशे को पूरा करने के लिए डाक्टर के नकली लेटरपेड और स्टाम्प का इस्तेमाल किया जाता है।
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इन दवाओं से किया जाता है नशा पूरा
बाजार में अवैध ढंग से शेड्यूल एक्स दवाओं की मांग बढ़ी है। मनोरोग अस्पताल जम्मू में आने वाले नशीली दवाओं के मामलों में अधिकांश टेपेंटाडोल, ट्रामाडोल ओएसडी, ट्रामाडोल इंजेक्शन, हाइपोनाटिक्स में निट्राजेपान, एरपराजोलम, कलोजीपाम, प्रेगाबेलिन, प्रोमेथाजीन आदि का सेवन कर रहे हैं। ये अन्य नशों से सस्ती होती हैं। इनमें अधिकांश टेबलेट और इंजेक्शनों का सहारा लेकर नशे को पूरा किया जाता है।
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गलत खुराक और ओवरडोज से जा सकती है जान
गांधीनगर अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डा. प्रवीण योगराज का कहना है कि अधिकांश नारकोटिक दवाएं दिमाग पर असर डालती हैं। गलत खुराक और ओवरडोज के कारण किसी की जान भी जा सकती है। ये दवाएं जोड़ों के दर्द, कैंसर, नशा छोड़ने के लिए वैकल्पिक थेरेपी के तौर पर मरीजों को तत्काल राहत के लिए दी जाती हैं।
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