- एक परिवार ने पिता समेत चार, दूसरे ने मां समेत तीन और तीसरा अब तक अपने चार बच्चे गंवा चुका
- कोशिशों के बावजूद मौत के कारणों पर रहस्य बरकरार, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बुखार, उल्टी, चक्कर आना और गला खराब होने के बाद एक के बाद एक मौतों से राजोरी जिले के बड्डाल क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। इस अज्ञात बीमारी से पिछले 38 दिन में बड्डाल के तीन परिवारों से 11 बच्चों समेत 14 लोगों की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। इसमें एक परिवार ने पिता समेत चार, दूसरे ने गर्भवती मां समेत तीन और तीसरे ने अब तक अपने चार बच्चे गंवा दिए हैं। इनमें दो परिवार आपस में रिश्तेदार थे। भरपूर कोशिशों के दावों के बावजूद अब तक मौत के असली कारणों का पता नहीं चलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। संबंधित अधिकारी खामोश हैं और कोई भी बोलने को तैयार नहीं है। इन मौतों के लिए किसकी जिम्मेदारी तय की गई, कुछ नहीं पता है।
गत 8 दिसंबर से बड्डाल गांव पर ऐसी बुरी नजर लगी है कि अब तक संदिग्ध मौतों का सिलसिला जारी है। हालांकि 23 दिसंबर से कुछ थम गया था, लेकिन नए साल में 12 जनवरी से रहस्मय मौतें फिर शुरू हो गई हैं। इसमें सबसे पहले वाले बड्डाल निवासी परिवार में शमीमा अख्तर ने अपने पति फजल हुसैन (40), बेटी फरमाना (7), राबिया कौसर (14), बेटे रुक्सान अहमद (10) और रफ्तार अहमद (4) को खोया। दूसरे परिवार में मोहम्मद रफीक ने गर्भवती पत्नी राजिम बेगम, बेटी नाजिया कौसर (7), बेटे मोहम्मद इश्तियाक (10), इशफाक अहमद (12) को खोया। तीसरे परिवार में मोहम्मद असलम की बेटी नवीना कौसर (9), बेटे जहूर अहमद (14), मोहम्मद फारूक (10) और बेटी सफीना कौसर (12) और दादा मोहम्मद यूसुफ की जान जा चुकी है। जबकि अन्य बेटी जबीना की हालत गंभीर बनी हुई है।
इन मौतों को लेकर संबंधित परिवारों में भी काफी रोष है। इसमें अपने चार बच्चों और पति को खो चुकी शमीमा अख्तर पुरी तरह से टूट चुकी है। पति और बच्चों की मौत के बाद उसे भी कई दिनों तक जीएमसी के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रखा गया। इस परिवार से भी जब बात की गई थी तो उनका कहना था कि उन्हें उनके परिवार के सदस्यों के मारे जाने के असली कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। ताजा मामले में एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में भर्ती यास्मीन अख्तर (15) की तीमारदारी में लगे उसके चाचा ने बताया कि जबीना (10) और सफीना कौसर (12) का एमआरआई करवाने के बाद वे लगातार बेहोशी की हालत में रह रही थीं। इससे पहले वे दोनों बिल्कुल ठीक थीं। उनका आरोप है कि वे बच्चियों की हालत के बारे में लगातार जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनके बीमार के असली कारणों के बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया गया। बाद में दोनों बच्चियों की मौत हो गई। उनका कहना था कि हम खुद असमंजस में हैं कि हमारे बच्चों के साथ अचानक क्या हो रहा है। उधर, मंगलवार को एक और बच्ची की मौत के बाद अधिकांश स्वास्थ्य अधिकारी जवाब देने के बजाय फोन काटते रहे। अधिकारियों को मैसेज भी किए गए, लेकिन किसी की तरफ से जवाब नहीं दिया गया।
पुराने ढर्रे वाली चिकित्सा प्रणाली को अपडेट करने की जरूरत-सामाजिक कार्यकर्ता
सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता सुकेश सी खजूरिया का कहना है कि बड्डाल क्षेत्र में लगातार हो रही संदिग्ध मौतों से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। अब तक मौतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्र के लोग डरे हुए हैं। अगर स्वास्थ्य विभाग सैकड़ों सैंपल लेने की बात कह रहा है तो उनके नतीजों को लोगों के सामने लाना चाहिए, ताकि उन्हें असलियत पता चल सके। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि हमारे अस्पतालों में स्वास्थ्य प्रणाली पुराने ढर्रे पर चल रही है। ऐसी तरह की नई बीमारियों को लेकर हम देशभर के अन्य चिकित्सा संस्थानों की तरह प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं। इसके लिए नियमित रूप से डाक्टरों और विशेषज्ञों में सीएमई (कांटिन्यू मेडिसिन एजूकेशन) का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अपडेट चिकित्सा प्रणाली हासिल हो सके।