गुलाम नबी शेख ने कहा कि चाहे जो विपदा आ जाए लेकिन हम मंदिर की देखरेख और सेवा बंद नहीं करेंगे। शेख की पत्नी की मौत हो चुकी है। अब मंदिर की देखरेख वह और उनका बेटा बिलाल करता है। वह कहते हैं कि मंदिर में साफ-सफाई और सेवा से मन को बहुत शांति मिलती है। हमारी ऊपर वाले से दुआ है कि वह अपनी इनायत फरमाए, यहां का माहौल बेहतर हो ताकि कश्मीरी पंडित यहां फिर से आकर रहें और दुनिया को पता चले कि असली कश्मीरियत वह नहीं, जो आजकल सुर्खियों में है। असली कश्मीरियत तो यहां की मिट्टी की खुशबू में है।
अमरनाथ यात्रा में भी सहयोग करते हैं मुस्लिम परिवार
कश्मीर में बहुत से ऐसे मुस्लिम परिवार हैं जो कश्मीरियत की सच्ची मिसाल पेश करते हैं। इनमें बहुत से परिवार अमरनाथ यात्रा के दौरान लंगर लगाते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए घोड़े और पिट्ठू उपलब्ध कराने वाले मुस्लिम समाज के लोग हैं।