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मुफ्ती सरकार का बजट ‘नम पटाखा’ निकला

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विपक्ष कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने मुफ्ती सरकार के बजट को ‘नम पटाखा’ करार दिया। वित्त विभाग एक अनुभवी अर्थशास्त्री के नेतृत्व में होने के बावजूद बजट को सिरे से नकार दिया।
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कांग्रेस विधायक दल के नेता नवांग रिगजिन जोरा ने हसीब द्राबू के बजट पर चर्चा करते हुए विधानसभा में कहा कि उन्हें बजट में कुछ बड़ी घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यह सिर्फ ‘नम पटाखा’ निकला।

उन्होंने कहा कि बजट सिर्फ जमा और खर्च का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह सही दिशा और उचित नीयत के जरिये जीवन को बदलने की कार्यवाही है। दुर्भाग्य से यह बजट सिर्फ एकाउंट्स की नियमित प्रक्रिया है और इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
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पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए बजट में कुछ नहीं

जोरा ने कहा कि 14वें फाइनेंस कमीशन अवार्ड हस्तांतरण पर काफी शोर मचाया गया, लेकिन इसमें निकला कुछ नहीं। यह सच है कि इस तरह के हस्तांतरण वैधानिक और गैर भेदभावपूर्ण होते हैं, लेकिन आपका योजनाबद्ध फंड और आधे से ज्यादा आपकी केंद्रीय मदद वाली योजनाएं अवार्ड में ही सम्मिलित है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए बजट में कुछ नहीं है। जोरा ने सवालिया अंदाज में कहा, पिछली सरकार ने मदद के लिए 44 हजार करोड़ रुपये का केंद्र को प्रस्ताव भेजा था, उसका क्या हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदार वित्त पोषण (लिबरल फंडिंग) का वादा कहां गया। अभी तक रियासत को केंद्र से सिर्फ 700 करोड़ रुपये की मदद मिली है।
 
नेकां के विधायक मोहम्मद शफी (उड़ी) ने बजट अभिभाषण पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री के उस बयान पर विरोध जताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार केंद्र के पास ‘भीख का कटोरा’ लेकर नहीं जाएगी।

शफी ने कहा, ‘कोई भी केंद्र के पास भीख का कटोरा लेकर नहीं जाता। यह संविधान के तहत केंद्र और रियासती सरकार के गारंटी संबंध के अनुसार केंद्र सरकार प्रदेश सरकारों को फंड मुहैया करवाती है।’
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