सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती मरीजों का उपचार करने के लिए की जाती है। अब अस्पताल में ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों के पास दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के प्रवेश पर रोक होगी। स्वास्थ्य मंत्री लाल सिंह ने इस आशय पर जोर देते हुए कहा कि तमाम अस्पताल प्रशासन इस बात का ख्याल रखें कि काम करने के समय एमआर अस्पताल में प्रवेश न करें।
इसी तरह से सरकारी अस्पताल परिसरों में निजी दवा कंपनियों के पोस्टर, इश्तेहार अथवा अन्य प्रचार सामग्री प्रदर्शित नहीं की जाएगी। यदि कहीं पर निजी दवा कंपनियों के इश्तेहार मौजूद भी हैं, तो उन्हें तत्काल हटाया जाए। शनिवार को शहर के भीतर स्थित महात्मा गांधी जच्चा-बच्चा अस्पताल और जिला अस्पताल की व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंचे लाल सिंह ने ये निर्देश दिए हैं। लाल सिंह ने कहा कि जच्चा-बच्चा अस्पताल को उन्होंने ही बतौर स्वास्थ्य मंत्री मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में इसकी उपेक्षा होती रही।
अब वह अस्पताल को पहले चरण में पचास और उसके बाद सौ बिस्तर क्षमता का मुकम्मल अस्पताल की व्यवस्था देने जा रहे हैं। लाल सिंह ने कहा कि सभी मंजूर पदों को भरा जाएगा। बाल और महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तमाम सुविधाओं के साथ तैनात होंगे। वहीं स्वास्थ्य मंत्री लाल सिंह ने आईएसएम के कार्यालय और आयुष के तहत चल रहे चिकित्सा संस्थानों का भी निरीक्षण किया।