इंदु कंवल चिब कहती हैं कि मदर्स डे पर वह अभिभावकों से कहना चाहती हैं कि बच्चों को केवल नसीहत देकर सिखाने की कोशिश न करें। पहले माता-पिता को वह सारी बातें अपने आचरण में लानी चाहिए। बच्चे सुनकर नहीं देखकर सीखते हैं। मां होने के नाते वह यह कभी नहीं भूलती। इसीलिए व्यक्तिगत हो या पेशेवर जीवन, अपने आचरण को संस्कार का आधार मानकर चलती हैं। सरकार ने यदि कोई जिम्मेदारी दी है तो उसे ईमानदारी से निभाना पहली प्राथमिकता है। यही ईमानदारी बतौर मां भी पूरी तरह से निभाने का प्रयास करती हैं। हम कैसा जीवन जी रहे हैं बच्चों के लिए वही सबसे महत्वपूर्ण होता है।