जिम्नास्टिक कोच कृपाली पटेल सिंह
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मातृत्व-शक्ति का त्याग और बलिदान न सिर्फ एक घर बल्कि राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान देता है। कोरोना संकट के समय में मां की भूमिका सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुश्किल दौर में कामकाजी महिलाएं अपने काम और परिवार के बीच संतुलन बनाकर अपना कर्तव्य निभा रही हैं, जो मातृत्व शक्ति का परिचय है।
जम्मू के ज्यूल स्थित संत मार्केट में रहने वाली अजुर्न अवार्डी जिम्नास्टिक कोच कृपाली पटेल सिंह एक मां के साथ-साथ अपने कार्य का भी निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में वह परिवार की देखभाल के साथ देश में जिम्नास्टिक के विकास को लेकर एक प्रोजेक्ट तैयार कर रही हैं, जो भारत सरकार द्वारा दिया गया है।
इसमें जिम्नास्टिक खेल को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर काम चल रहा है। इसके साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन कोचिंग क्लासेज भी हैं। इसमें दो घंटे का ऑनलाइन सेशन होता है, जिसमें खिलाड़ियों को कोचिंग दी जाती है।
मूलतः गुजरात के आनंद जिले की रहने वाली कृपाली की शादी जम्मू में हुई है। कृपाली को 1989 में जिम्नास्टिक के लिए अर्जुन अवार्ड भी मिला है। जम्मू में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कृपाली ने कहती हैं कि पांच महीने के बच्चे के साथ ग्राउंड में वह प्रैक्टिस करने जाती थीं। इसमें परिवार और पति का पूरा सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि बच्चे अकेला नहीं रहें, इसके लिए प्रतियोगिता में भाग लेने के दौरान उन्हें भी साथ लेकर जाती थीं।