कश्मीरी पंडितो के सदियों पुराने धार्मिक स्थल कौसरनाग झील पर एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है। इस झील के किनारे कुछ स्थानीय मुस्लिम युवकों ने एक मस्जिद का निमार्ण किया है।
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झील के किनारे निर्माणाधीन मस्जिद को लेकर हिंदू समुदाय ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहा कि यह एक सोची समझी साजिश के तहत मस्जिद बनाई गई है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों कौसरनाग यात्रा पर कश्मीर घाटी में जमकर बवाल मचा था और घाटी में बंद की घोषणा की थी। कश्मीरी पंडितों को राज्य सरकार ने सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका के मद्देनजर यात्रा की अनुमति भी नहीं दी थी।
घाटी के अलगाववादी संगठनों ने कौसरनाग यात्रा को कश्मीर में कश्मीरी मुस्लिमों के खिलाफ भाजपा की साजिश करार दिया था। वहीं, नेकां ने पर्यावरण बिगड़ने की आशंका जताते हुए इसका विरोध किया था।
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सोशल साइट पर वायरल हुई फोटो
सूत्रों के मुताबिक अब ऐसी खबर आ रही है कि दक्षिण कश्मीर के कुछ मुस्लिम युवकों के एक दल ने झील पर एक अस्थाई मस्जिद का निर्माण कर लिया है। हालांकि, अधिकारिक तौर पर कोई भी वरिष्ठ अधिकारी इस संदर्भ में बोलने को तैयार नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ दिनों पहले कुलगाम जिले से लगभग दो दर्जन युवक कौसरनाग झील पर पहुंचे थे। जहां पर उन्होंने झील के किनारे पत्थरों से करीब तीन फीट ऊंची दीवार तैयार की और इसमें भीतर बैठकर नमाज अता की थी।
इन मुस्लिम युवकों ने अपनी इन तस्वीरों को विभिन्न सोशल साइटों पर भी अपलोड कर दिया था। इसके बाद ये फोटो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रही है।
राजनीति दबाव में रद की थी यात्रा की अनुमति
चंद दिनों पहले ‘सेव कौसर नाग फ्रंट’ और अलगाववादियों ने कौसर नाग यात्रा का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह पर्यटन स्थल है और इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। वहीं अब धार्मिक स्थल बनाए जाने पर कश्मीरी पंडित हैरान हैं।
अब यह विवाद राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। एक समुदाय का मानना है कि सोची समझी रणनीति के तहत कौसर नाग यात्रा की अनुमति नहीं दी गई।
एपीएमसीसी (ऑल पार्टी माग्रेंट्स कोआर्डिनेशन कमेटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता किंग भारती के अनुसार सरकार ने यह फैसला किसी दबाव में आकर लिया था, क्योंकि जिला प्रशासन ने पहले इस यात्रा को आयोजित करने की अनुमति दी थी।
धार्मिक स्थल की नींव रखने से फैल रहा तनाव
भारती के अनुसार अलगाववादियों और सेव कौसर नाग फ्रंट ने यह आरोप लगाते हुए कि यात्रा पर 4000 भक्त जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होगा, यात्रा पर प्रतिबंध लगवाया था।
अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि कौसर नाग झील पर जो धार्मिक स्थल की नींव रखी गई है, क्या उससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। एपीएमसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह जो भी किया गया सिर्फ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किया गया है।
भारती ने राज्य एवं केंद्र सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर अगर कश्मीरी पंडितों को अपनी धार्मिक यात्राओं पर जाने से रोका जा रहा है तो फिर केंद्र द्वारा विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए पुनर्वास नीति के तहत घाटी वापस लाने का कोई फायदा नहीं।
धार्मिक महंत दिपेंद्र गिरि ने इस विवाद को मैत्रीपूर्ण ढंग से सुलझाने को कहा है ताकि कश्मीर का सदियों से चला आ रहा भाईचारा कायम रहे।
कौसर नाग कश्मीर घाटी में पीर पंजाल पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। इसे कौसर नाग झील के रूप में भी जाना जाता है। जो कश्मीरी हिंदुओं का सदियों पुराना धार्मिक स्थल है।
जिसका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। यह समुद्र की सतह से 12000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। कश्मीर में इसे विशुद्ध पानी का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है।
इस बार कौसर नाग यात्रा कुलगाम जिले के अहर्बल से आरम्भ होनी थी, लेकिन राज्य सरकार द्वारा ऑल पार्टी माग्रेंट्स कोआर्डिनेशन कमेटी (एपीएमसीसी) को जिला प्रशासन द्वारा दी गई यात्रा की अनुमति को स्थगित कर दिया गया। राज्य सरकार के इस आदेश से एपीएमसीसी के अलावा कश्मीरी पंडितों के खेमे में काफी रोष है।