पुंछ। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की तरफ से की जा रही गोलाबारी के बाद वहां बिखरे बिना फटे मोर्टार शेल लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते इन शेल को निष्क्रिय नहीं किया गया तो स्कूल खुलने पर बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं।
जिले में बालाकोट से साबजियां तक के नियंत्रण रेखा से सटे दर्जनों गांव में सैकड़ों की संख्या में पाकिस्तानी गोले लोगों के घरों के आसपास, खेतों और रास्तों में कहीं जमीन के अंदर तो कहीं जमीन के बाहर पड़े हैं। इसके चलते लोग खेतों में काम करने से जाने में भी डरते हैं। करमाड़ा सेक्टर के अंतिम गांव सयाल में एक हफ्ते में पाकिस्तानी गोलाबारी में फटने से बच गए करीब 12 मोर्टार शैल बिखरे पडे़े हैं।
गांव निवासियों मोहम्मद सादिक, शहजाद अहमद, मोहम्मद सलीम आदि का कहना है कि गांव अथवा घरों की तरफ आने वाले कच्चे रास्तों में गोलों के दबे होने के कारण हमें रास्ता ही बदलना पड़ गया। न तो पशुओं को खुला छोड़ पा रहे हैं और न ही बच्चों को अकेले कहीं जाने दे रहे हैं। अभी लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हैं, अगर स्कूल खुले तो बच्चे इन गोलों के साथ शरारत कर सकते हैं। इसलिए हमारी प्रशासन से मांग है कि इन गोलों को निष्क्रिय करा कर दहशत से छुटकारा दिलाया जाए।
गांव निवासी मोहम्मद सादिक ने कहा कि अभी एक हफ्ते के दौरान पाकिस्तानी गोलाबार में करीब 12 से 14 मोर्टार गांव में बिखरे पड़े हैं, जिनमें 82 एमएम और 120 एमएम के मोर्टार हैं। अगर गलती से भी उनमें विस्फोट हो जाए तो भारी नुकसान हो सकता है।